मिर्जापुर(शाहजहांपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टर के किशोरी से दुष्कर्म करने की घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने सोमवार को जमकर हंगामा किया। भीड़ ने सीएचसी में ताला डाल दिया। स्टाफ से अभद्रता की और दवा लेने आए रोगियों को भगा दिया। पुलिस के पहुंचने पर हंगामा कर रहे युवक सीएचसी में डाले गए तालों की चाबियां लेकर भाग गए। थानाध्यक्ष ने ताले तुडवाकर अस्पताल खुलवाया। सुरक्षा की दृष्टि से सीएचसी पर पुलिस तैनात कर दी गई है।
बता दें कि सीएचसी जरीनपुर में तैनात डॉ. नरेंद्र कुमार ने रविवार दोपहर गांव की एक किशोरी को अपने सहयोगी से बुलवाया और फिर उसे दवा वितरण कक्ष में बंदकर दुराचार किया। इस मामले में पुलिस ने किशोरी के भाई की तहरीर पर डॉ. नरेंद्र और उसके सहयोगी संतोष उर्फ सतीश यादव के खिलाफ रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है।
सीएचसी प्रभारी डॉ. नवीन भारती ने बताया कि सोमवार सुबह 10:30 बजे सीएचसी खुलने पर ग्रामीणों ने वहां आकर हंगामा करते हुए स्टाफ से अभद्रता शुरू कर दी। भीड़ ने चौकीदार से सीएचसी की चाबियाें का गुच्छा छीन लिया और दवा लेने आए रोगियों को भगाकर मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। डॉ. भारती ने फोन से इसकी सीएमओ और थानाध्यक्ष को सूचना दी। थानाध्यक्ष धनंजय सिंह 11:30 बजे पुलिस लेकर सीएचसी पहुंचे। पुलिस को देखकर हंगामा कर रहे लोग भाग गए। एसओ ने सीएचसी के मुख्य द्वार पर पड़ा ताला तुड़वाकर व्यवस्था सुचारू करवाई। थानाध्यक्ष ने सुरक्षा की दृष्टि से सीएचसी पर पुलिस तैनात कर दी है।
यादव नहीं अनुसूचित जाति का है डॉ. नरेंद्र
दुराचार का आरोपी डॉ. नरेंद्र अनुसूचित जाति का है। वह बरेली की बहेड़ी तहसील के गांव बालपुर का मूल निवासी है। चूंकि जरीनपुर क्षेत्र यादव बहुल है सो डॉ. नरेंद्र खुद को यादव बताता था। उसकी क्षेत्र के प्रभावशाली यादवों के बीच अच्छी पहचान बन गई है। सीएचसी प्रभारी डॉ. नवीन ने बताया कि डॉ. नरेंद्र की पोस्टिंग दिसंबर, 2016 में यहां हुई थी।
डॉक्टर की करतूत से स्टाफ शर्मसार
सीएचसी का डॉक्टर की करतूत से बेहद शर्मसार है। सोमवार सुबह गांव के लोगों के हंगामा करने के दौरान सीएचसी स्टाफ का अनहोनी को लेकर भयभीत रहा। हालांकि अब सीएचसी पर पुलिस तैनात कर दी गई लेकिन अब भी स्टाफ बेहद डरा हुआ है।
मामला निपटाने की कोशिश शुरू
पहले यहां तैनात रहा एक डॉक्टर क्षेत्र के मोअज्जिज लोगों से अपने संबंधों का वास्ता देकर किसी भी तरह आरोपी डॉक्टर को बचाने के लिए पाड़ित पक्ष से समझौता कराने को कह रहा है, लेकिन मामला अभी चूंकि ताजा है और लोगों में इसे लेकर बेहद गुस्सा है सो कोई भी आरोपी डॉक्टर की पैरवी को आगे नहीं आ रहा है।