गोली लगने से श्यामप्रकाश जौहरी एक दुकान के बाहर तख्त पर गिर गए। फायरिंग से आसपास भगदड़ मच गई। ऊषा की तहरीर पर अखंड प्रताप, केके सिंह और रामचंद्र के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय भेजा।
न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने अखंड प्रताप सिंह और केके सिंह को आजीवन कारावास और दो-दो लाख रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया। अदालत ने जुर्माने की संपूर्ण धनराशि चार लाख रुपये प्रतिकर के रूप में श्याम प्रकाश जौहरी के वारिसों को दिलाने का आदेश दिया है। आरोपी रामचंद्र की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
दो विवेचकों पर भी होगी कार्रवाई
अदालत ने फैसले में लिखा है कि इस केस में विवेचक ने जिस प्रकार से विवेचना के दौरान लापवाही बरती है, वह समझ से परे है। एक व्यक्ति जिसकी दुस्साहसिक हत्या कर दी जा रही है, उसकी हत्या में प्रयुक्त तमंचे की बावत विवेचक द्वारा आरोपपत्र में न तो कोई अभिलेख व दस्तावेज प्रस्तुत किया गया और न ही उसके द्वारा जिला मजिस्ट्रेट से कोई भी अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई है। यह अत्यंत लापरवाही भरा और खेदजनक है।
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ऐसा लगता है कि विवेचक द्वारा अभियुक्तों को अन्यथा लाभ से लाभान्वित होकर लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रकार की हरकत की गई है , जो क्षम्य नहीं है। ऐसी स्थिति में न्यायालय ने उत्तर प्रदेश डीजीपी को आदेश दिया है कि विवेचक वीरपाल सिंह और नत्थू सिंह के खिलाफ कड़ी विभागीय जांच कर दंडित करें। न्यायालय को दो महीने के अंदर की गई विभागीय कार्रवाई से अवगत कराएं।