शाहजहांपुर। शहर समेत जिले में विभिन्न स्थानों से लिए गए चीनी से बने खिलौनों, साबुत हल्दी और शहद गोल्ड ब्रांड दूध के नमूने प्रयोगशाला जांच में मिलावटी और मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए हैं। इन मामलों में खाद्य आयुक्त से स्वीकृति मिलने के बाद एफएसडीए के अधिकारियों ने मुकदमों की पत्रावलियां तैयार करनी शुरू कर दी हैं। आरोप सिद्ध होने पर संबंधित विक्रेताओं को जुर्माने के साथ कारावास की सजा हो सकती है।
पिछले वर्ष दिवाली पर एफएसडीए ने नमूने लेने का अभियान चलाया था। बंडा कस्बे में मिठाई की एक बंद दुकान के पीछे छापा मारकर वहां संचालित कारखाना में चीनी से रंगीन खिलौने बनते पाए थे। खिलौनों के तीन नमूने लिए गए। खुटार क्षेत्र के नरौठा की एक किराना दुकान से साबुत हल्दी और शहर में हनुमत धाम स्थित विकास डेयरी से शहद गोल्ड ब्रांड दूध पैकेट के नमूने लिए थे। लखनऊ स्थित राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला ने हल्दी में पीलापन लाने के लिए लेड क्रोमियम पाउडर और रंगीन खिलौनों में औद्योगिक इस्तेमाल वाले अखाद्य रंग की मिलावट पाए जाने पर दोनों वस्तुएं मानव स्वास्थ्य के लिए घातक प्रमाणित कीं।
खास यह रहा कि लखनऊ लैब से ब्रांडेड दूध का नमूना स्वीकृत कर दिया लेकिन अधिकारियों को दूध मिलावटी लगा। अभिहीत अधिकारी विजय कुमार वर्मा ने पांच हजार रुपये शुल्क राजकीय कोष में जमा कराकर शहद गोल्ड ब्रांड का दूध पैकेट गहन जांच को कोलकाता स्थित रेफरल लैब भेजा। वहां से आई रिपोर्ट में दूध में झाग लाने को डिटर्जेंट मिलाने की पुष्टि होने पर तीनों मामलों में मुकदमे दर्ज कराने के लिए खाद्य आयुक्त से अनुमति मांगी गई। आयुक्त ने स्वीकृति दे दी है।
अभिहीत अधिकारी के अनुसार भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 59 के तहत अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। ब्रांडेड दूध के मुकदमे में विक्रेता डेयरी संचालक समेत निर्माता और पैकर को भी प्रतिवादी बनाया जाएगा।