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Shahjahanpur News: शहरवासी त्रस्त, अनुमति में फंसा बंदर पकड़ो अभियान

Mon, 12 Feb 2024 02:09 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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शाहजहांपुर। बंदरों के उत्पात से शहरवासी परेशान हैं। रोजाना ही नगर निगम में 12 से अधिक शिकायतें पहुंच रही हैं, लेकिन निगम का बंदर पकड़ो अभियान वन विभाग की अनुमति न देने से फंस गया है। वन विभाग का कहना है कि बंदर जंगली पशु नहीं है। इसलिए बंदरों को जंगल में छोड़ा नहीं जा सकता।
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सदर क्षेत्र के बहादुरगंज, कटिया टोला, इंदिरा नगर कॉलोनी और चौक क्षेत्र में बंदरों का ज्यादा आतंक है। शायद ही ऐसा कोई दिन होगा जिस दिन नगर निगम कार्यालय में बंदरों को पकड़वाने के लिए पत्र न पहुंचता हो। निगम के अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम की ओर से स्थानीय स्तर पर वन विभाग से अनुमति मांगी थी, लेकिन बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा रही। वहीं, वन विभाग का मानना है कि बंदर जंगली पशु नहीं हैं। इसलिए उनको जंगल में नहीं छोड़ने दिया जा सकता। ऐसे में बंदरों के आतंक से छुटकारा मिल पाना फिलहाल संभव नहीं हो रहा।





घरों को जाल से लगाकर किया सुरक्षित, कटआउट लगाए
- बंदर लोगों के घरों में घुसकर सामान को तहस-नहस कर रहे हैं। यदि उनको भगाने का प्रयास किया जाता है, तो हमलावर हो जाते हैं। बचने के लिए लोगों को अपने घरों को लोहे का जाल लगाकर सुरक्षित करना पड़ रहा है। वहीं कुछ लोगों ने लंगूरी बंदर के कटआउट भी लगा रखे हैं, जिसको देखकर बंदर घरों में न घुसें।
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कुत्तों और गायों से भी जान को खतरा

- नगर निगम के पास कुत्तों को पकड़ने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है। हालांकि, नगर निगम एनिमल सेंटर बनवा रहा है जहां पर कुत्तों की नसबंदी की जाएगी, लेकिन बाद में उन्हें दोबारा उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा, जहां से उनको पकड़ा जाएगा। जबकि निराश्रित गोवंश को पकड़वाने के लिए कैटिल कैचर चलवाए जा रहे हैं। बावजूद इनकी संख्या सड़कों से कम नहीं हो रही। यह निराश्रित गोवंश आपस में लड़ने के साथ ही दूसरों की जान भी ले रहे हैं।



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बंदरों को पकड़वाने के लिए छह महीने पहले अभियान चलाया गया था। पकड़े गए बंदरों को खीरी के जंगलों में छुड़वाया गया, तो वन विभाग ने 50 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया गया और अनुमति लेने की बात कही गई। अनुमति के लिए पत्र लिखा, लेकिन वह भी नहीं मिली। कुत्तों को पकड़ने कोई व्यवस्था नहीं है। गोवंश को पकड़कर गोशाला भिजवाया जा रहा है।
- डॉ. मनोज कुमार मिश्रा, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम शाहजहांपुर।

नगर निगम की ओर से अनुमति प्रदान करने के लिए पत्र मिला था, लेकिन बंदर जंगली पशु की श्रेणी में नहीं आते। इसलिए उनको जंगल में छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके अलावा उनको कहां छोड़ा जाए, इसके लिए कोई जगह नहीं बता सकते।
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-प्रखर गुप्ता, डीएफओ
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