अधिवक्ता के द्वारा चिन्मयानंद ने अदालत में प्रार्थना पत्र दिया कि वह एक 'कमजोर और बुजुर्ग है, गंभीर बीमारियों के कारण कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर नहीं हो पा रहे हैं'। उन्होंने हाईकोर्ट, इलाहाबाद में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया है, जिसकी सुनवाई 19 दिसंबर को होनी है। चिन्मयानंद ने एनबीडब्ल्यू की प्रक्रिया में रियायत देते हुए उपस्थिति के लिए समय प्रदान करने का अनुरोध किया।
विशेष लोक अभियोजक नीलिमा सक्सेना की ओर से इस पर मौखिक आपत्ति दर्ज की गई। अभियुक्त द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। चिन्मयानंद के खिलाफ पहले से ही गैर जमानती वारंट जारी है। पत्रावली पर किसी भी सक्षम न्यायालय का स्थगन आदेश मौजूद नहीं है। पत्रावली में रिपोर्ट लगी है कि चिन्मयानंद लगातार फरार चल रहे हैं। जीडी में दर्ज है कि आरोपी की तलाश में दबिश दी गई, लेकिन वह नहीं मिले। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि चिन्मयानंद हरिद्वार गए हुए हैं। अभी तक वापस नहीं आए हैं।
इस पर अदालत ने सभी तथ्यों के मद्देनजर स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत आदेशिकाएं जारी करने का आदेश जारी किया। इसके तहत चिन्मयानंद के निवास स्थान, किसी सार्वजनिक स्थान, न्यायालय आदि स्थानों पर उद्घोषणा की प्रति चस्पा की जाए। आदेश के अनुपालन के लिए एसपी और संबंधित थानाध्यक्ष को आदेशित किया जाए। अदालत ने अग्रिम कार्यवाही के लिए 16 जनवरी की तारीख तय की है।
यह है मामला
चिन्मयानंद के खिलाफ उनकी शिष्या ने 2011 में चौक कोतवाली में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। 2018 में भाजपा सरकार ने मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन पीड़िता के एतराज पर अदालत ने प्रक्रिया खारिज कर दी थी। चिन्मयानंद के हाजिर न होने के कारण अदालत ने उनके खिलाफ पहले जमानती फिर गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था। चिन्मयानंद सुप्रीम कोर्ट गए लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी। वहीं पुलिस अब तक चिन्मयानंद को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।