चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी मां के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। इसमें अष्टमी और नवमी का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मां दुर्गा की नौ शक्तियों का आह्वान कर कन्याओं का पूजन होगा। साथ ही भोज करवाया जाएगा।
शाहजहांपुर के दुर्गा माता मंदिर के पुजारी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 29 मार्च को है। अष्टमी को दुर्गाष्टमी और महाअष्टमी भी कहते हैं। नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी का पूजन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि देवी महागौरी पवित्रता और शांति का प्रतीक हैं। मां दुर्गा की शक्तियों का आह्वान कर अष्टमी के दिन देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस भक्त दिन कन्या पूजन व भोज कराते हैं। साथ ही उन्हें उपहार भी देते हैं। 30 मार्च को महानवमी है।
मान्यता है कि महानवमी के दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। नवमी के दिन भक्त माता के नौवें अवतार मां सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। महानवमी पर गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनने जा रहे हैं।
कन्या पूजन की विधि
नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को उनके घर जाकर निमंत्रण दें। गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ स्वागत करें। अब कन्याओं को आरामदायक और साफ जगह पर बैठाएं।
सभी के पैरों को दूध से भरे थाल में रखकर अपने हाथों से धोएं। कन्याओं के माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाएं। फिर मां अम्बे का ध्यान करके कन्याओं को भोजन कराएं। फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दें और उनके पैर छूकर आशीष लें।
कब तक रहेगी अष्टमी व नवमी
अष्टमी तिथि की शुरुआत 28 मार्च को शाम 07.02 बजे होगी। समापन 29 मार्च को रात 09.07 मिनट पर होगा। नवमी तिथि 29 मार्च को रात 09.07 बजे से शुरू होकर 30 मार्च को रात 11.30 बजे समाप्त होगी।