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Shahjahanpur News: जम्हूरियत की लाश को कंधे पे उठाकर गांधी की समाधि पे चढ़ा क्यों नहीं देते

Sun, 05 Mar 2023 12:53 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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मुमुक्षु महोत्सव में योद्धा के हावभाव में आल्हा प्रस्तुत करतीं शीलू सिंह राजपूत
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शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव की अंतिम संध्या पर वीर रस से ओतप्रोत आल्हा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आकाशवाणी कलाकार शीलू सिंह राजपूत ने चंदेली कवि द्वारा लिखित आल्हा को योद्धा के हावभाव में प्रस्तुत करके दर्शकों में जोश भर दिया। आल्हा के बाद अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने काव्य पाठ किया।
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कार्यक्रम का संचालन कर रहे अनपरा, सोनभद्र से आए कवि कमलेश राजहंस ने कहा -
इस मुल्क की तबाही कितना करोगे,
और क्या है तुम्हारे दिल में बता क्यों नहीं देते।
जम्हूरियत की लाश को कंधे पे उठाकर,
गांधी की समाधि पे चढ़ा क्यों नहीं देते।
उज्जैन के गीत सम्राट कैलाश तरल ने सुनाया-
ये देश राम का राम की धरती,
मंदिर क्यों न हो राम का।
कानपुर के व्यंग्यकार डॉ. सुरेश अवस्थी ने पढ़ा-
हमको बनावटी लोगों के व्यवहार अच्छे नहीं लगते,
ईमान बिक गए जहां वह बाजार अच्छे नहीं लगते।
कोटा, राजस्थान के देवेंद्र वैष्णव ने हास्य रचना सुनाई
टीवी पर चल रहा था आधे कपड़ों में गाना,
बेटे ने कहा दूसरा चैनल तो लगाना।
राजू तू सो जा बेटे यह गरीब लड़की है,
ज्यादा गरीब आए तो पापा मुझको जगाना।
कार्यक्रम के अध्यक्ष जौनपुर के व्यंग्यकार कवि सभाजीत द्विवेदी ‘प्रखर’ ने व्यंग्य सुनाया-
शीश आदर्श का बोझ लादे हुए,
पांव गंतव्य की ओर बढ़ता रहा।
मैं जहां से चला था वहीं रह गया,
जबकि अविराम वर्षों से चलता रहा।
वाराणसी की कवयित्री विभा शुक्ला ने अपनी बात कुछ इस तरह कही-
चाहती हूं कि दिल में बिठा लूं तुम्हें,
पास आओ गले से लगा लूं तुम्हें।
होकर दीवानी तेरी बनूं राधिका,
तुम कहो तो मैं मोहन बना लूं तुम्हें।
अमेठी से पधारीं कवयित्री संदल अफरोज ने कहा-
मैं जब घर से निकलती हूं, वफाएं साथ रहती हैं,
गमों की धूप में तेरी घटाएं साथ रहती हैं।
जमाने की हवाओं से कभी संदल नहीं डरती,
हिफाजत के लिए मां की दुआएं साथ रहती हैं।
कवि एवं गीतकार डॉ. इंदु अजनबी, डॉ. शिशिर शुक्ला ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। अंत में प्रमिला मित्तल ने आल्हा गायक शीलू सिंह राजपूत का सम्मान अंगवस्त्र उड़ाकर किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरके आजाद, उप प्राचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कवियों को माल्यार्पण कर एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर बिट्ठल माहेश्वरी, अशोक अग्रवाल, रामचंद्र सिंघल, सुरेश सिंघल, प्रमोद प्रमिल, ईशपाल सिंह, जयशंकर ओझा, ओम सिंह, फिरोज हसन खान, अरविंद सिंह, डॉ. केके शुक्ला, संजीव गुप्ता, डॉ. अमीर सिंह यादव, डॉ. आलोक कुमार सिंह, डॉ. कमलेश बाबू गौतम, रामनिवास गुप्ता, डॉ. बरखा सक्सेना, डॉ. कविता भटनागर, डॉ. प्रतिभा सक्सेना आदि मौजूद रहे।

मुमुक्षु महोत्सव में योद्धा के हावभाव में आल्हा प्रस्तुत करतीं शीलू सिंह राजपूत

मुमुक्षु महोत्सव में योद्धा के हावभाव में आल्हा प्रस्तुत करतीं शीलू सिंह राजपूत

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