शाहजहांपुर। रक्षाबंधन पर सोमवार को जिला कारागार परिसर में भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनों की भीड़ उमड़ पड़ी। लंबे इंतजार के बाद राखी बांधने व माथे पर तिलक लगाने पर भाई-बहन भावुक हो गए। इस दाैरान बहनों ने भाइयों से अब अपराध न करने का वचन लिया। साथ ही उनकी जल्दी रिहाई की कामना की।
पर्व को लेकर सुबह सात बजे से जेल गेट पर बहनों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पर्ची बनाने के उपरांत 50-50 के समूह में महिलाओं को जेल के अंदर प्रवेश दिया गया। अंदर खुले में राखी बंधवाने के इंतजाम किए गए थे। बहनों ने जेल में सजा काट रहे भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के बाद माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाते हुए मुंह मीठा कराया।
मिलाई का सिलसिला शाम तक चलता रहा। इस दाैरान अपनों से लंबे समय बाद मिलने पर कई भाई-बहन भावुक भी हो गए।
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नेपाली और अफ्रीकी बंदियों ने भी बंधवाया रक्षा सूत्र
-ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने हर वर्ग के व्यक्ति को अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी। नेपाली और अफ्रीकी बंदियों के भी रक्षा सूत्र बांधा। अफ्रीकी बंदी के ब्रह्मा कुमारी बहनों ने तिलक किया तो उसने उनका चरण स्पर्श किए। सभी को मिठाई का वितरण भी किया गया। इस बीच अधिकारी-कर्मचारियों के भी राखी बांधी गई। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने उन्हें उपहार दिए। त्योहार पर पूड़ी, हलवा व विशेष सब्जी भी बंदियों के लिए बनाई गई।
1080 महिलाओं और 225 बच्चाें ने की मुलाकात
-जिला कारागार में 1250 बंदी निरुद्ध हैं। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने बताया कि रक्षाबंधन के त्योहार पर 1080 महिलाओं व 225 बच्चों ने जेल में प्रवेश किया है।
शाहजहांपुर में जिला कारागार में ब्रह्माकुमारी बहन के चरण स्पर्श करता अफ्रीकी नागरिक। स्रोत: जेल
शाहजहांपुर में जिला कारागार में ब्रह्माकुमारी बहन के चरण स्पर्श करता अफ्रीकी नागरिक। स्रोत: जेल
शाहजहांपुर में जिला कारागार में ब्रह्माकुमारी बहन के चरण स्पर्श करता अफ्रीकी नागरिक। स्रोत: जेल
शाहजहांपुर में जिला कारागार में ब्रह्माकुमारी बहन के चरण स्पर्श करता अफ्रीकी नागरिक। स्रोत: जेल