एप्रोच रोड से बाढ़ का पानी चढ़ जाने से नाव से गंतव्य को जाते ग्रामीण। संवाद
जलालाबाद। तिकोला गांव के पास बहगुल नदी पर 15 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल एक बार फिर अनुपयोगी साबित हो रहा है। संपर्क मार्ग डूबने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
बुधवार को ग्रामीणों को लेकर बहगुल पार जा रही नाव दो बार पलट गई। गनीमत रही कि वहां सिर्फ घुटनों तक पानी था। इससे बड़ा हादसा होने से बच गया। खंडहर क्षेत्र में करीब डेढ़ दर्जन गांव उत्तर दिशा में बहगुल और दक्षिण में रामगंगा से घिरे हैं। बरसात के मौसम में ये सभी गांव टापू बन जाते हैं। इन गांवों के लोगों की आवागमन की दिक्कत को देखते हुए 2021 में बहगुल नदी पर 15 करोड़ रुपये की लागत से पुल बनवाया गया था।
इससे क्षेत्र के लोगों का तहसील मुख्यालय से सीधा जुड़ाव हो गया, लेकिन पुल के दूसरी ओर का संपर्क मार्ग काफी नीचे है। वहां पुलिया नहीं बनाए जाने से बरसात में बाढ़ का पानी पुल के पहुंच मार्ग के ऊपर बहने लगा। विधायक हरिप्रकाश वर्मा के हस्तक्षेप से गत वर्ष वहां पुलिया बनाई गई, लेकिन उसकी ऊंचाई भी ज्यादा नहीं रखी गई। अब चार दिन से पानी मार्ग और पुलिया के ऊपर से होकर करीब सौ मीटर के दायरे में बह रहा है।
प्रभारी तहसीलदार रोहित कटियार ने बताया कि तिकोला पुल के पास ज्यादा लोगों के बैठने से नाव असंतुलित हो जाती है। तिकोला में सरकारी नाव संचालित है। नाविक को ज्यादा लोग नहीं बिठाने के निर्देश दिए गए हैं।