शाहजहांपुर। जिले के बेसिक स्कूलों को इंग्लिश मीडियम घोषित कर उन्हें कॉन्वेंट स्कूलों की टक्कर का बनाने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। ये स्कूल बदहाली का शिकार हैं। स्कूलों के भवन जर्जर हालत हैं, उनमें भी बच्चों को बैठने के लिए कमरे और बेंच तक नहीं हैं। सबसे बड़ी बात इन स्कूलों अंग्रेजी पढ़ाने वाले अध्यापक भी नहीं हैं। ऐसे में इनका इंग्लिश मीडियम होना अपने आप में सवाल है।
वर्तमान में जनपद की 1069 ग्राम पंचायत में 256 प्राथमिक विद्यालय इंग्लिश मीडियम घोषित हैं। इन्हीं में से कक्षा 6 से 8 तक इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय 19 हैं। बेसिक स्कूलों में कान्वेंट की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। जिले में प्रथामिक विद्यालय हथौड़ा और प्राथमिक विद्यालय चिनौर को अंग्रेजी मीडियम में उच्चीकृत कर मॉडल स्कूल बनाया गया था। बेहतर परिणाम देख शासन ने प्रत्येक विकास खंड में दस- दस प्राथमिक विद्यालय इंग्लिश मीडियम में परिवर्तित कर दिए। 2020 तक इंग्लिश मीडियम स्कूलों की संख्या 256 हो गई।
कंपोजिट विद्यालय रोटी गोदाम में लिंटर की सरिया दिखने लगीं
नगर क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय रोटी गोदाम में संचालित प्राथमिक विद्यालय को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई के लिए चिह्नित किया गया था। इस विद्यालय में 80 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय भवन जर्जर हालत में है। एक कमरे के लिंटर की सरिया दिखने लगी हैं। छज्जे को रोकने के लिए लोहे के एंगिल लगवाए गए हैं। प्रधानाध्यापक इमरान सईद ने बताया कि शिक्षक की नियुक्त नहीं की गई है। भवन को ठीक कराने के लिए बजट नहीं मिलता, स्वयं के प्रयास से जितना होता है, करते हैं।
कंपोजिट विद्यालय खलीलशर्की में अंग्रेजी का शिक्षक नियुक्त नहीं
कंपोजिट विद्यालय खलीलशर्की के परिसर में चार विद्यालय संचालित हो रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय खलीलशर्की को अंग्रेजी माध्यम के लिए चिह्नित किया गया था। इसमें 112 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय के भवन की स्थिति जर्जर है। प्रधानाध्यापक ममता सिंह ने बताया कि कक्षों की संख्या कम होने की वजह से बच्चों को बैठना मुश्किल होता है। स्मार्ट क्लास लगाने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन उसके लिए कमरा ही नहीं है। बताया कि अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई कराने के लिए कोई शिक्षक नियुक्त नहीं है।
जर्जर भवन के चारों ओर बांधी रखी है रस्सी
पुवायां। गांव चौसेड़ा के प्राथमिक स्कूल को हिंदी से इंग्लिश मीडिया तो बना दिया गया, लेकिन बच्चे जर्जर भवन में ही बैठ कर पढ़ाई करने पर विवश हैं। स्कूल में 113 और आंगनबाड़ी में 48 बच्चे हैं। कक्षा तीन के बच्चों को शिक्षिका पुराने जर्जर भवन के एक कमरे में पढ़ाती हैं। पुराने भवन का बरामदा बिल्कुल जर्जर हो गया है और किसी भी समय गिर सकता है। इसीलिए शिक्षकों ने बच्चों को सुरक्षित रखने में लिए उसके चारों ओर रस्सी बांध दी है। प्रधानाध्यापक का कहना है कि जर्जर भवन की पहले भी कई बार रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
जनपद में 256 प्राथमिक विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के संचालित हो रहे हैं। शिक्षकों की कमी है। शासन स्तर से नियुक्ति की जाएगी। भवनों की देखरेख पर ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए जाते हैं। - सुरेंद्र सिंह, बीएसए