चीनी मिलों को पर्याप्त समय तक चालू हालत में रखने के लिए प्रदेश में शरद कालीन गन्ना प्रजातियों का क्षेत्रफल बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। साथ ही चीनी मिलों को देर तक चलाने के लिए शरदकाल में शीघ्र पकने वाली गन्ना प्रजातियों की बुवाई को प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रदेश के गन्ना आयुक्त विपिन कुमार द्विवेदी ने गन्ना शोध परिषद के अतिथि गृह में पत्रकारों से वार्ता करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 40 लाख किसान हर साल 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की फसल ले रहे हैं। गन्ना की सारी फसल सूबे की 116 चीनी मिलों और 143 खांडसारी इकाइयों में खप रही है, लेकिन नो केन की स्थिति में अधिकांश चीनी मिलें सर्दी का सीजन खत्म होने से पहले ही बंद हो जाती हैं। जबकि चीनी मिलें अप्रैल माह तक चलनी चाहिए। मिलों को देर तक चलाने के लिए किसानों को शरदकाल में शीघ्र पकने वाली गन्ना प्रजातियों की बुवाई को प्रोत्साहित करने का निर्णय किया गया है। गन्ना आयुक्त ने बताया कि वर्तमान में शरदकालीन गन्ना बुवाई का क्षेत्रफल केवल पांच प्रतिशत है। सर्दी के सीजन में बोए जाने वाले गन्ना का क्षेत्रफल बढ़ाने के साथ अर्ली वैरायटी वाली 238, 118, 98014, 08272 आदि गन्ना प्रजातियों की बुवाई कराई जाएगी। इस कदम से चीनी मिलों को पूरे सीजन पया्रप्त मात्रा में गन्ना मिलेगा और किसानों को फसल का वाजिब दाम मिल सकेगा। गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए किए जा रहे अन्य प्रयासों का उल्लेेख करते हुए गन्ना आयुक्त ने बताया कि अगैती और सामान्य श्रेणी के गन्ना उत्पादन का अनुपात 40-60 किया जाएगा। अभी अगैती प्रजाति का गन्ना 34 फीसदी क्षेत्रफल में बोया जा रहा है। किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए उन्हें गन्ने के साथ गेहूं, मटर, मसूर, मूंग, आलू आदि की सह फसली खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है।