बदनामी के डर से चाकू से रेता गला
पूर्व में आसाराम के आश्रम में चौकीदारी करने वाला शिवनाथ पिछले दो साल से देहरादून में काम करता था। वह जिस किराये के कमरे में रहता था, उसी के पास में सीता का कमरा था। पति कैलाश की मृत्यु होने के बाद उसे बेटा छोड़कर चला गया था। बेटी की शादी के बाद जलकर मृत्यु हो गई थी। अकेली सीता को शिवनाथ ने सहारा दिया। बीमार होने पर उसकी देखभाल भी करने लगा था।
पुलिस को शिवनाथ ने बताया कि सीता ने बैंक में एफडी तुड़वाकर एक लाख 30 हजार रुपये दिए थे। वह बार-बार अपने घर ले जाकर वहीं पर रहने की जिद करती थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 18 सितंबर को सीता को बस से हरिद्वार भेजा। फिर वह भी दूसरी बस से आ गया। वहां से दोनों शाहजहांपुर के हाईवे स्थित चांदापुर चौराहे पर उतरे। अविवाहित शिवनाथ ने बताया कि सीता उससे उम्र में काफी बड़ी थी। गांव में अधिक उम्र की महिला को घर में रखने पर बदनामी के डर के चलते उसकी हत्या की थी।
आश्रम में ठहराने का बहाना कर ले गया था
पुलिस के अनुसार, चांदापुर चौराहे पर उतरने के बाद शिवनाथ ने आसाराम बापू के आश्रम में ठहराने की बात कही थी। उसने सीता को बताया था कि कुछ दिन यहां रुक लें, परिजन को विश्वास में लेने के बाद घर लेकर चलेंगे। फिर बहाने से महिला को खेत की मेड़ पर बैठा दिया। बाद में चाकू से गला रेत दिया। पहचान छिपाने के लिए उसके कपड़े उतार दिए थे।
मोबाइल ऑन होते ही पुलिस को मिला सुराग
हत्या के बाद आरोपी ने देहरादून में अपना काम शुरू कर दिया। सर्विलांस सेल को सीता के मोबाइल नंबर की लोकेशन देहरादून की मिली। पुलिस ने उसकी पहचान कराते हुए देहरादून के लिए टीम को भेजा। महिला के मकान मालिक से बात हुई। इसके बाद आरोपी शिवनाथ का नाम प्रकाश में आने के बाद उसकी तलाश शुरू की।
आरोपी ने अपना फोन बंद कर लिया था। जबकि सीता का मोबाइल लगातार चल रहा था। पकड़े जाने के डर से बैंक खातों से एक लाख रुपये व ज्वैलर्स को चेन बनवाने को दिए 30 हजार रुपये वापस लिए थे। कंपनी में छुट्टी लगाकर छिपता रहा। वह यहां पर हत्या के मामले में पुलिस की कार्रवाई के बारे में जानकारी लेने के लिए आया था, तभी हत्थे चढ़ गया।