शाहजहांपुर। गांवों में अमृत सरोवर के रूप में नए तालाबों की खोदाई हो रही है और शहरों के पुराने तालाबों को सुनियोजित तरीके से कब्जाया जा रहा है। मोहल्ला बीबीजई हद्दफ और लोधीपुरा में स्थित तालाब को धीरे-धीरे पाटकर लोगों ने मकान बनवा लिए। इससे तालाबों का क्षेत्रफल घट गया है।
दो दशक में बढ़ने वाले आबादी को ध्यान में रखकर शाहजहांपुर महायोजना-2031 बनाई गई है। इसमें शहरी क्षेत्र के विकास के साथ उसके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए कई जगह पार्कों समेत हाईवे किनारे हरित पट्टी बनाने का प्रावधान किया गया है। वहीं शहर के पुराने तालाबों के संरक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। वहां लगातार कब्जे हो रहे हैं। घनी आबादी के बीच मोहल्ला बीबीजई हद्दफ में करीब दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में पक्का तालाब है। अभिलेखों में सुन्नी सेंट्रल बोर्ड की वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज इस तालाब के तीन ओर मकान बने हैं और दक्षिण में एप्रोच रोड है। रोड साइड में तालाब का किनारा सुरक्षित है लेकिन बाकी तीन दिशाओं में जिनके मकान बने हैं, उनमें से कई लोग तालाब की जमीन मिट्टी-कूड़े से पाटकर अपने मकानों का पिछला हिस्सा बढ़ा रहे हैं। इससे तालाब का रकबा एक चौथाई सिकुड़ चुका है। बसपा सरकार में तालाब पाटकर वहां कांशीराम पार्क बनाने के लिए बोर्ड भी लगाया गया। बाद में सपा शासनकाल में पार्क का बोर्ड उखाड़ दिया गया। उसी दौरान नगरपालिका के सफाईकर्मियों ने वहां लोडर से शहर का कूड़ा गिराकर तालाब पाटना चाहा तो जागरूक लोग सड़क पर उतर आए थे।
लोधीपुर के बाढ़ क्षेत्र में तालाब पाटकर शुरू किया निर्माण
लोधीपुर में खन्नौत पुल के पास सड़क के दायीं ओर कई बीघा में फैला पुराना तालाब तीन माह से मिट्टी डालकर पाटा जा रहा है। खन्नौत पुल से लेकर लोधीपुर में सूफी संत हजरत बूलनशाह उर्फ दादा मियां की दरगाह तक 177 गाटा नंबरों की जमीनें डूब क्षेत्र में शामिल हैं और वहां कोई पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता। पाटा जा रहा तालाब भी डूब क्षेत्र में आता है। तालाब का करीब दो तिहाई हिस्सा डंपरों से मिट्टी डालकर समतल करने के बाद वहां वाहनों की पार्किंग होने लगी है। तालाब के कुछ हिस्से में रोड के किनारे पक्की दुकानों का निर्माण भी हो रहा है। तालाब का जो हिस्सा बाकी बचा है, वह जलकुंभी से भरा है।
पांच तालाबों पर कब्जेदारों को दिए जा चुके नोटिस
शहर के अजीजगंज में कई प्राकृतिक तालाब अवैध कब्जों की भेंट चढ़ रहे हैं। राजस्व विभाग भी मानता है कि शहर में करीब एक दर्जन पुराने तालाब हैं और उनमें से अजीजगंज में पांच और पड़ोस के गांव नवादा इंदेपुर में तीन तालाबों पर कब्जे किए गए हैं। अजीजगंज में गर्रा नदी के डाम रोड के किनारे बने तालाब पर भी लोगों ने अवैध कब्जे कर वहां पक्के निर्माण कर लिए हैं। वर्ष 2019 में तालाबों की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आने पर प्रशासन ने तालाबों पर कब्जा जमाने वाले अजीजगंज, नवादा इंदेपुर और बीबीजई हद्दफ में रहने वाले करीब 40 लोगों को नोटिस भी जारी किए, लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते मेें चला गया।
शहर में सार्वजनिक महत्व की जमीनों और तालाबों पर अवैध कब्जों में लिप्त लोगों को लगातार चेतावनी दी जा रही है कि वह कब्जा छोड़ दें। यदि कोई निर्माण किया है तो उसे खुद हटा लें। अन्यथा निर्माण ध्वस्त कराने के साथ उस पर होने वाला खर्च भी उनसे वसूल किया जाएगा। लोधीपुर में रोड के किनारे पाटे जा रहे तालाब के बारेा में तहसील से जमीन की श्रेणी का पता लगाया जाएगा। हो सकता है यह किसी की व्यक्तिगत संपत्ति हो। इस तालाब के बारे में जांच कराकर आगे की कार्रवाई तय होगी। -आशीष कुमार सिंह, नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र)/सिटी मजिस्ट्रेट