मानस कथा मर्मज्ञ ब्रजबिहारी लाल व्यास ने कहा कि श्रीराम मर्यादा पुरूषोत्तम थे। उन्होंने आजीवन मर्यादाओं का पालन किया। व्यास ने गांव बेहटा संवात के शिव मंदिर पर चल रही रामकथा के अंतिम दिन लक्ष्मण शक्ति का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण के शक्ति लगने के बाद जब हनुमान जी सुषेण वैद्य को रामादल में लेकर आए और श्रीराम ने उनसे लक्ष्मण का उपचार करने का अनुरोध किया तो वैद्यराज ने कहा कि वह रावण के वैद्य हैं और श्रीराम जी से उनका युद्ध चल रहा है। ऐसे में उनका लक्ष्मण का इलाज करना अनुचित है। श्रीराम ने वैद्यराज से कहा कि वह उन पर लक्ष्मण के इलाज का दबाव नहीं डालेंगे चाहे धर्मयुद्ध में लक्ष्मण के प्राण भले ही चले जाएं। व्यास ने भजनों के माध्यम से रामकथा के प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।