अल्हागंज। पीएचसी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिलने के बाद भी यहां सुविधाएं नदारद हैं। 40 गांवों की 35 हजार की आबादी इलाज के लिए मात्र एक डॉक्टर व फार्मासिस्ट पर निर्भर है। वहीं, लैब टेक्नीशियन के अभाव में मशीनें धूल फांक रही हैं।
वर्ष 2012 में अल्हागंज स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिल गया था। सीएचसी पर रोजाना 300-400 की ओपीडी रहती है, लेकिन गंभीर तो छोड़ो, कई बार सामान्य इलाज के लिए भी मरीजों को 60 किमी दूर जिला मुख्यालय की ही दौड़ लगानी पड़ती है। हालांकि, पड़ोसी जिला फर्रुखाबाद भी 25 किमी दूर है, लेकिन फर्रुखाबाद की सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाले रामगंगा नदी पर बने कोलाघाट पुल से चार पहिया वाहनों के गुजरने की मनाही है तो पैंटून पुल पर जाम के कारण मरीजों को वहां जाने में काफी दिक्कत उठानी पड़ती है।
इतना है स्टाफ
वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह के सापेक्ष मात्र एक ही डॉक्टर की तैनाती है। जबकि, आबादी के हिसाब से तीन डॉक्टर तो होने ही चाहिए। फार्मासिस्ट भी छह के सापेक्ष एक हैं। वार्ड बॉय 8 के बजाय दो ही तैनात हैं। जबकि, लैब टैक्नीशियन नियुक्त ही नहीं है। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए नगर स्थित अन्य पैथालॉजी पर ही निर्भर रहना पड़ता है। अन्य जांच मशीनों के साथ एक्सरे-मशीन भी धूल फांक रही है। महिला चिकित्सक की भी नियुक्त नहीं है।
स्वास्थ्य केंद्र की समस्याओं के संबंध में उच्चाधिकारियों को पूर्व में अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने जल्द ही समस्याओं से निजात दिलाने का आश्वासन दिया है।
- डॉ. अश्वनी, सीएचसी प्रभारी