जलालाबाद और कलान तहसील में गंगा, रामगंगा की बाढ़ से लोगों को स्थायी राहत दिलाने के लिए प्रशासन ने 70 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को मंजूरी के लिए भेजा है। इस बीच, बैराजों से रिलीज पानी की मात्रा में कमी आने के साथ गंगा और रामगंगा का जलस्तर कम होने लगा हैष इसके साथ ही तटवर्ती इलाकों में भूमि कटान में तेजी आ गई है। जिले से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा में बारिश के दौरान बाढ़ से हर साल भारी तबाही होती है। वर्ष 2010 और 2011 में दोनों नदियों में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई थी। सैकड़ों बीघा कृषि योग्य जमीन नदियों में समा गई थी और सैकड़ों परिवार बेघर होकर सड़कों पर आ गए थे। यही नहीं, नाव पलटने से एक महिला और उसके दुधमुंहे बच्चे की मौत भी हो गई थी। इस बार औसत वर्षा में कमी से बाढ़ का पहले जैसा तांडव नहीं दिखा, लेकिन गंगा-रामगंगा में पानी चढ़ने के साथ दोनों तहसीलों के दो दर्जन से अधिक गांव टापू बन गए और उनका मुख्यालय से संपर्क कट गया। इसे देखते प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के फौरी उपाय करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे काम कराने का निर्णय किया कि वहां के लोगों को बाढ़ की विपदा से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। डीएम नरेंद्र सिंह ने बताया कि इसके लिए 70 करोड़ के अनुमानित बजट की परियोजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि रामगंगा का बहाव इतना अनिश्चित है कि उसकी बाढ़ से होने वाले नुकसान का आकलन पहले से करना संभव नहीं है। रामगंगा के तट पर बसा 15 हजार की आबादी वाला परौर गांव इसका प्रमाण है, जहां बीते दिन रामगंगा के कटान से उसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया। डीएम के अनुसार परौर में कटान की सूचना पर वह स्वयं रातभर परौर में बने रहे। देर रात से सुबह तक लोडर-डंपर के माध्यम से ठोकरों के लिए निर्माण सामग्री पहुंचाई गई और सभी के सहयोग से परौर को कटान से बचा लिया गया। उन्होंने बताया कि 70 करोड़ के प्रोजेक्ट से ऐसे काम कराए जाएंगे जो आने वाले समय के लिए टिकाऊ साबित होंगे। उधर, गंगा के जल स्तर में बुधवार को तीसरे दिन भी बढ़ोत्तरी जारी रही। पिछले 48 घंटे के दौरान रामगंगा के जल स्तर में 14 सेमी की मामूली कमी आई है। इसके बावजूद जलालाबाद व कलान तहसील के मोहनपुर, पहरुआ आदि गांवों में कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता बांस के ढांचों में मिट्टी की बोरियां भरकर कच्ची ठोकरें बनवाने में जुटे हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष प्रभारी/सिंचाई विभाग के तार बाबू सुरेंद्र वर्मा के अनुसार रामगंगा से कटान थमने में 48 से 72 घंटे का समय लग सकता है, बशर्ते बारिश भी थमी रहे।