शाहजहांपुर। माना जाता है पितृ पक्ष में पूर्वर्जों का तर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं। पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। लेकिन तमाम लोगों को पितृ पक्ष में भी अपने पूर्वजों की याद नहीं आई है। लोग अपनों के अस्थि कलश लेने के लिए अभी तक मोक्षधाम नहीं पहुंचे हैं। ऐसी स्थिति में खन्नौत मोक्षधाम पर 170 और गर्रा मोक्षधाम पर करीब 50 अस्थि कलश गंगा में प्रवाहित करने के लिए अपनों का इंतजार कर रहे हैं।
नगरीय इलाके में गर्रा और खन्नौत धाम पर सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार होते हैं। मोक्षधाम प्रशासन के निर्देश हैं कि संस्कार के तीन दिन के बाद अस्थि कलश को ले जाकर नदी में प्रवाहित कर दें। मौत के बाद लोग अपनों से मुंह मोड़ लेते हैं। गर्रा मोक्षधाम पर गत वर्ष 2021 तक के अस्थि कलश रखे हुए हैं, जिन्हें ले जाने की उनके अपनों को फुर्सत नहीं मिली है। पिछले साल के करीब 10 से अधिक कलश रखे हुए हैं। इसके अलावा करीब 160 अस्थि कलश अभी गर्रा के मोक्षधाम में रखे हुए हैं।
कलश पर लिखे नाम, परिजनों को फोन से कराया जाएगा याद
गर्रा मोक्षधाम पर रखे हुए 170 अस्थि कलश कमरों में रखे हुए हैं। संस्कार के बाद के फूल मिट्टी की मटकी में बांधने के बाद उसे थैले में रख दिया। उस थैले पर मृतक का नाम लिखकर उसके परिजनों का नंबर अंकित कर दिया गया। करीब एक साल अधिक होने के बाद भी कलश लेने नहीं आने वालों को याद कराया जाएगा। श्मशान के केयरटेकर रामबली नंबरों पर फोन कर अस्थि कलश के बारे में बताएंगे। पितृपक्ष के शुरू होने के अगले दिन से यह कार्य शुरू होगा।
अज्ञात शवों के कलश के लिए एक सप्ताह का इंतजार
दोनों ही मोक्षधाम पर अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। उन शवों के अस्थि कलश के लिए किसी के आने का एक सप्ताह तक इंतजार होता है। इसके बाद अस्थियों को केयरटेकर स्वयं ही नदी में प्रवाहित कर देते हैं।
दो साल के बाद कलश लेने आए, मायूस होकर लौटे
केयरटेकर रामबली ने बताया कि जनवरी 2021 में एक व्यक्ति की मौत होने पर उसके परिजन अस्थिकलश लेने के लिए आए थे। उन्हें कलश नहीं मिल सका। संभावना है कि गत वर्ष पंजाबी महासभा ने अस्थियों को गंगा जी में प्रवाहित कर दिया होगा।
अमावस्या पर विसर्जित करेंगे अस्थियां
पंजाबी महासभा के पदाधिकारी अमावस्या पर अस्थियों को गंगाजी में प्रवाहित कराने के लिए ले जाएंगे। महासभा के सचिव सुनील गुप्ता ने बताया कि जिनके बुजुर्गों के अस्थि कलश मोक्षधाम में रखे हैं, वे प्राप्त कर लें। इसके बाद अस्थियों को पंजाबी महासभा विसर्जित कर देगी।