संतकबीरनगर के धनघटा के महुली क्षेत्र के डहरौली में शनिवार को करंट की चपेट में आने से युवक की मौत हो गई। युवक दो दिन पूर्व ही अपने भाई की शादी में शामिल होने से लुधियाना से घर आया था। बेटे की मौत की से परिजनों का रो- रो कर बुरा हाल था।
क्षेत्र के डहरौली निवासी राम नवल राजभर का दूसरे नंबर का बेटा चंद्रिका राजभर (19) शनिवार को घर पर था। परिजनों ने बताया कि दोपहर में घर के अंदर टूटे विद्युत केबल तार को हाथ से पकड़कर जोड़ने का प्रयास कर रहा था। उसी दौरान बिजली सप्लाई आने से अचानक चंद्रिका को करंट का जोरदार झटका लगा और वह जमीन पर गिरकर तड़पने लगा।
घर में पोछा लगा रही बहन सुंदरी की नजर पड़ी, शोर मचाया तो लोग पहुंच गए। लकड़ी आदि से चंद्रिका के हाथों से तार हटाया। आनन- फानन में उपचार के लिए पहले महुली फिर बाद में सीएचसी नाथनगर लेकर गए।
हालत गंभीर देख चिकित्सक जिला अस्पताल रेफर कर दिए। जिला अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने देखकर चंद्रिका की मौत की पुष्टि कर दी। परिजन शव को लेकर घर पहुंच गए। युवक की आकस्मिक मौत से गांव में मातम पसर गया।
भइया की शादी में बनूगा सहबाला, नाचूंगा और भाभी को करूंगा तंग, कह कर रो पड़ी बहन
महुली क्षेत्र के डहरौली में राम नवल राजभर के बड़े की शादी की तैयारियां घर पर चल रही थीं। मझला बेटा बड़े भाई की शादी में सहबाला बनने, खूब नाचने और भाभी को तंग करने की बातें करता रहता था, लेकिन उसे क्या पता था कि करंट के झटके से उसकी सांस थम जाएगी।
यह कहते-कहते इकलौती बहन फफक कर रो पड़ी। मां-बाप भी बेटे की असमय मौत से गमगीन थे। डहरौली गांव निवासी रामनवल के तीन बेटे और इकलौती बेटी है। सबसे बड़ा 23 वर्षीय बेटा बलबीन, दूसरे नंबर का बेटा चंद्रिका (19 ) था, जबकि 18 वर्षीय तीसरे नंबर का बेटा अभिमन्यु है, और इकलौती 16 वर्षीय बेटी सुंदरी है।
तीनों भाई बलबीन, चंद्रिका और अभिमन्यु लुधियाना में मेहनत मजदूरी करते थे। बड़े भाई बलबीन की शादी 11 जून को तय है। बड़े भाई बलबीन के साथ चंद्रिका भी दो दिन पूर्व लुधियाना से घर आकर शादी की तैयारी में जुट था। छोटा भाई दो दिन बाद घर आने वाला है।
परिजनों के अनुसार तो चंद्रिका बड़े भाई की शादी को लेकर काफी उत्साहित था। कभी भाई को तो कभी बहन को आने वाली नई नवेली भाभी की बात कहकर तंग करता रहता था। शादी की तैयारी में जुटे पिता रामनवल, बड़ा भाई बलबीन और मां उषा देवी कहीं गए हुए थे। घर पर चंद्रिका टूटे बिजली के तार को जोड़ने लगा। उसी समय बहन सुंदरी घर में पोंछा लगा रही थी।
अचानक चंद्रिका करंट की चपेट में आकर तड़पने लगा तो बहन की नजर उस पर पड़ी। भाई को तड़पता देखकर बहन घबरा गई और जोर-जोर से आवाज देकर लोगों की गुहार लगाई।
लोग जुटे और अस्पताल ले गई, लेकिन चंद्रिका की सांसें थम गईं। बहन रोते हुए यहीं बताई कि मझला भइया चंद्रिका बड़े भइया को दूल्हा देखने की ख्वाहिश पाले थे। शादी को लेकर तमाम तरह की बातें करते थे, लेकिन करंट भइया की सांस छीन लेगा, यह कभी सपने में सोचा नही गया था।
मां भी बेटे की मौत पर बिलख रही थी। गांव के लोग यहीं कह रहे थे कि जिस घर में शहनाई बजने वाली थी, उस घर में शादी के एक सप्ताह पूर्व ही जवान बेटे की अर्थी निकली। लोग पीड़ित मां उषा देवी और पिता रामनवल को संभाल रहे थे और यहीं समझा रहे थे कि होनी को कोई नहीं टाल सकता है। बेटे की मौत पर मां- बाप के मुंह से यहीं शब्द निकल रहा था कि बेटा सहबाला बनने और भाई की शादी में नाचने और भाभी से बातें करने का ख्वाब पाले थे, लेकिन शादी के पहले की बेटा दुनिया छोड़ गया।