संतकबीरनगर। तालाब और पोखरे में जल संचय के लिए प्रतिवर्ष खोदाई कार्य पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गर्मी आते ही तालाब और पोखर बेपानी होकर पशु पक्षियों को भटकने के लिए विवश कर दे रहे हैं। ऐसे में पानी भरने का भी इंतजाम जिम्मेदार नहीं कर रहे हैं।
भीषण गर्मी में जहां खराब हैंडपंप लोगों को पेयजल के लिए भटका रहे हैं, वहीं सूखे पड़े तालाब और पोखर पशु पक्षियों के परेशानी का कारण बने हैं। विकास खंड हैंसर बाजार, पौली और नाथनगर में अधिकतर पोखरे सूखे पड़े हैं। किसी भी पोखरे में पानी नहीं है। इससे पशुपालक भी परेशान हैं। लोगों का कहना है कि जल संचय के लिए हर तीसरे चौथे वर्ष पोखरे और तालाब की खोदाई की जाती है। इस वर्ष अधिकतर पोखरों से पानी निकाल कर खोदाई की गई।
खोदाई कार्य पूर्ण हो जाने के बाद भी पोखर में पानी भरने का कोई इंतजाम नहीं किया गया। इसका नतीजा यह है कि पशु पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं। गोपीपुर, सेमरडाडी, बैकुंठपुर, रूपिन, बकौली कला, पतजू, बैजनाथपुर, मटौली, सिसवा, गायघाट, रामपुर, छितौनी आदि गांव में स्थित पोखरे बेपानी हो गए हैं।
पशुपालक रामसेवक, सुरेश, वीरेंद्र, रामलाल, देव शरण, उदयभान, रामचंद्र आदि का कहना है कि तापमान ने 42 डिग्री को पार करके प्राणियों का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में पानी की कमी होना सभी के लिए घातक है। गांव के तालाब और पोखरा में हर हाल में पानी भरा जाना आवश्यक है, लेकिन इस गंभीर समस्या की तरफ जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। जल संचय का दावा इस समय हवा हवाई साबित हो रहा है।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी महावीर सिंह का कहना है कि जिन पोखरों में पानी नहीं है। उसमें पानी भरने के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम प्रधान को निर्देशित कर दिया गया है। इस भीषण गर्मी से पानी ही बचाव है।