-जिला अस्पताल के डॉक्टर 80 फीसदी मरीजों का इलाज करने के बजाय कर दे रहे गोरखपुर रेफर
गर्मी से हो रहे परेशान, अस्पतालों में लगे पंखे भी नहीं सुखा रहे पसीना
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में सोमवार को एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। माना जा हरा है कि उसकी मौत भीषण गर्मी के कारण हुई है। इसके साथ ही तीन लोगों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। दूसरी तरफ 42 मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। विशेष बात यह है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर मरीजों काे अस्पताल इलाज करने बजाय उन्हें गोरखपुर रेफर कर दे रहे हैं। जिले में बीते चार दिन में दो मौतें हुई हैं, दूसरी तरफ 190 मरीज इमरजेंसी में आए उसमें से 18 को भर्ती किया गया और 38 को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी में सोमवार की दोपहर खलीलाबाद के पुरानी तहसील की रहने वाली 62 वर्षीय महिला गंभीर हालत में लेकर परिजन पहुंचे। महिला को तेज बुखार था और बेसुध थी। अभी डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू ही किया था कि महिला की मौत हो गई। इसके बाद परिजन महिला को लेकर घर चले गए। इमरजेंसी में शाम तक तीन मरीजों को मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया।
इन सभी का बीपी लो, तेज बुखार आदि की शिकायत थी। इसके अलावा जिला अस्पताल में 24 लोगों का इलाज चल रहा है। वहीं सीएचसी मेंहदावल में 12 मरीज इलाज करा रहे हैं। सीएचसी हैंसर में तीन मरीज, सीएचसी नाथनगर में दो मरीज, सीएचसी सेमरियावां में एक मरीज का इलाज चल रहा है। हालांकि डॉक्टर इसे सामान्य रोग बता रहे हैं। उनका कहना है कि जिन मरीजों का इलाज हो रहा है, वह सभी उल्टी दस्त व बुखार से पीड़ित हैं।
सीएमएस डॉ. महेश प्रसाद ने बताया कि अभी तक हीट स्ट्रोक से किसी के मरने की सूचना नहीं है। एक महिला आई थी वह कई दिनों से बीमार थी। उसकी मौत अस्पताल में हुई है। अस्पताल में इलाज की समुचित व्यवस्था है।
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ओपीडी में लग रही लंबी लाइन
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की ओपीडी में लंबी लाइन लग रही है। जहां पहले 1100 के करीब मरीज इलाज कराते थे, वहीं यह संख्या बढ़कर 1400 के करीब हो गई है। इसमें ज्यादातर मरीज बुखार और उल्टी दस्त से पीड़ित पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही पर्ची काउंटर पर लंबी लाइन लगी रही। चिकित्सकों के कमरे के बाहर मरीजों की भीड़ रही।
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गर्मी में परेशान हो रहे मरीज व तीमारदार
संतकबीरनगर। इस भीषण गर्मी में जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी पर मरीज व उनके तीमारदार परेशान हो रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल में कुल 59 एसी लगे हैं, जो चिकित्सक व कर्मचारियों के कमरे में हैं, जबकि इमरजेंसी वार्ड, जनरल वार्ड आदि में पंखे तो लगे हैं लेकिन वह भी सही से हवा नहीं दे रहे हैं। जिला अस्पताल में मरीज के तीमारदार बरामदे में बैठकर किसी तरह से समय काट रहे हैं, और मरीजों की सेवा कर रहे हैं। इसके साथ ही लाइट न रहने पर हाथ के पंखे से पसीना सुखा रहे हैं। यह हाल सभी सीएचसी व पीएचसी का है।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण
गर्म लाल शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उथले श्वास गति में तेजी आना, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना, सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी होना चक्कर आना, मूत्र न होना अथवा इसमें कमी होना आदि हीट स्ट्रोक के लक्षण हैं।
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हीट स्ट्रोक से बचाव
अपर सीएमओ डॉ. मोहन झा ने बताया कि हीट स्ट्रोक से बचने के लिए तेज धूप में निकलने से बचें, धूप से बचाव का चश्मा, छाता लेकर या टोपी पहन लें एवं ऐसे हल्के रंग के कपड़े पहने, जिससे शरीर अधिक से अधिक ढका रहे। अगर आप खुले में कार्य करते हो तो सिर, चेहरा हाथ पैरों को गीले कपड़े से ढके रहें। हीट स्ट्रोक से बचने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर घर से निकलें। समय-समय पर पानी पीते रहें, निर्जलीकरण से बचने के लिए अति आवश्यक है कि अधिक मात्रा में पानी, मौसमी फलों का रस कच्चे आम का पन्ना ओआरएस घोल, नारियल पानी का उपयोग किया जाए। चाय काफी शराब आदि पीने से परहेज करें।