- बिचौलिए वीरेंद्र के माध्यम से 30,000 रुपये देकर फर्जी ढंग से बनवाया था पासपोर्ट
- फर्जी पासपोर्ट के सहारे दो बार बैंकाक की कर चुकी है यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। फर्जी पासपोर्ट के सहारे बैंकाक जाने की कोशिश के दौरान युवक कोलकाता एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया। एयरपोर्ट प्रशासन की सूचना पर पुलिस वहां पहुंची और ट्रांजिट रिमांड पर आरोपी को बृहस्पतिवार देर शाम लेकर आ गई। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपी को गोरखपुर भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में गोरखपुर जिला जेल भेज दिया।
एसपी सत्यजीत गुप्ता ने पासपोर्ट सत्यापन में अनियमितता की शिकायत पर पूर्व सीओ अंशुमान मिश्रा से जांच कराई थी। जांच में वर्ष 2021-22 में कुल 101 पासपोर्ट के सत्यापन में हेराफेरी का मामला सामने आया था। 96 ऐसे लोगों का पासपोर्ट सत्यापित कर दिया गया था, जो दर्शाए गए पते पर रहते ही नहीं थे। वे लोग दूसरे जिले के निवासी हैं। इसमें कई लोगों का नाम-पता गलत दर्शाया गया था। इसके अलावा कई ऐसे लोगों का पास पासपोर्ट भी सत्यापित कर दिया गया, जिनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हैं। 47 लोग गलत नाम-पते पर पासपोर्ट बनवा कर रूस, कांगो, दुबई, बैंकाक, कुवैत, इराक, थाईलैंड आदि देशों में चले गए हैं। फर्जी नाम-पते पर पासपोर्ट बनवा कर विदेश गए 11 लाेगों को पुलिस ने चिह्नित किया है। इन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने लुक आउट सर्कुलर जारी किया था।
एसपी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि लुक आउट सर्कुलर के जरिए ही एयरपोर्ट कोलकाता से सूचना मिली कि फर्जी पासपोर्ट के सहारे एक आरोपी बैंकाक जाने की फिराक में है और उसे पकड़ा गया है। एसपी ने एसएसआई कोतवाली हरिकेश भारती की अगुआई में पुलिस टीम कोलकाता भेजी। पुलिस टीम आरोपी को जिले में लेकर पहुंच गई है। एसपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपी की वास्तविक पहचान दीपक यादव पुत्र दिनेश यादव निवासी लेडुआबारी थाना बांसगांव जिला गोरखपुर के रूप में हुई। जबकि आरोपी फर्जी तरीके से शिवकुमार पुत्र उत्तम प्रसाद निवासी गुलाम मंझरिया कोतवाली, संतकबीरनगर के नाम से पासपोर्ट बनवा लिया था। आरोपी के पास से कूटरचित पासपोर्ट शिवकुमार पुत्र उत्तम प्रसाद, माता का नाम राधिका देवी निवासी/पता गुलाम मंझरिया खलीलाबाद संतकबीरनगर, एक अदद बोर्डिंग पास कोलकाता से बैंकाक, थाईलैंड/बैंकाक की 20 रुपये की कुल 90 अदद मुद्रा/करेसीं बरामद हुई।
वर्ष 2019 में बनवाया पहला पासपोर्ट हो गया था प्रतिबंधित
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह रोजगार के सिलसिले में विदेश जाने के लिए वर्ष 2019 में पहला पासपोर्ट बनवाया था, जो उसके वास्तविक नाम दीपक यादव पुत्र दिनेश यादव निवासी लेडुआबारी थाना बासगांव जनपद गोरखपुर के नाम से गोरखपुर जनपद से बना था। उस पासपोर्ट पर बैंकाक गया था, बैंकाक का दो माह का टूरिस्ट वीजा था, लेकिन ज्यादा समय तक बैंकाक में रहने की वजह से पासपोर्ट 10 साल के लिए प्रतिबंधित हो गया था। उस पासपोर्ट से वह दोबारा बैंकाक नहीं जा सकता था। बैंकाक जाने के लिए नए पासपोर्ट की आवश्यकता थी। इसके लिए वह काफी भागदौड़ कर रहा था। इसी बीच पता चला कि बिचौलिए वीरेंद्र कुमार निवासी बिधियानी कोतवाली खलीलाबाद पासपोर्ट बनवाकर तमाम लोगों को विदेश भेज चुका है। संपर्क करने पर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पासपोर्ट आफिस के लोगों से उसकी जान-पहचान है। रुपये खर्च करने पड़ेंगे, पासपोर्ट बन जाएगा। उसने वीरेंद्र कुमार को 30,000 रुपये दिया था। उसके बाद उसका शिवकुमार पुत्र उत्तम प्रसाद निवासी गुलाम मंझरिया थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर के नाम से नया पासपोर्ट बन गया। इस पासपोर्ट से आरोपी दो-तीन बार बैंकाक की यात्रा कर चुका है। 17 अगस्त को कोलकाता एयरपोर्ट से बैंकाक के लिए फ्लाइट पकड़ने गया था, तभी कोलकाता एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन वालों ने पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपी को जेल भेज दिया गया।
इंसेट
अब तक दस लोग भेजे जा चुके हैं जेल
फर्जी पासपोर्ट प्रकरण में अब तक दस लोग जेल भेजे जा चुके हैं। सबसे पहले पुलिस एलआईयू के मुख्य आरक्षी मनोज पटेल और बिचौलिए वीरेंद्र यादव को जेल भेजा था। उसके बाद तथ्य छिपाकर पासपोर्ट बनवाने के मामले में सात सितंबर को पुलिस ने दुधारा क्षेत्र के जातेडीहा गांव निवासी आरोपी अब्दुल सलाम और गोरखपुर जिले के गोला क्षेत्र के सकरदेईया निवासी एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अरविंद यादव उर्फ अमन को जेल भेजा था। इसके बाद बड़हलगंज क्षेत्र के मटिहानी निवासी अनिरुद्ध यादव, देवरिया जिले के रुद्रपुर क्षेत्र के करनपुरा निवासी संजय यादव, गोरखपुर जिले के गोला क्षेत्र के मन्नीपुर सहडौल निवासी राजेंद्र यादव को जेल भेजा था। इसके अलावा पासपोर्ट सेल का आरोपी दरोगा कामेश्वर भी जेल गया था।