संतकबीरनगर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम दिनेश प्रताप सिंह ने आत्महत्या के लिए उकसाने और साक्ष्य छिपाने के मामले में आरोपी बनाए गए मामा-फूफा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता राम कृष्ण यादव ने बताया कि धनघटा क्षेत्र के तेजपुर की निवासी पार्वती देवी पत्नी तूफानी ने धनघटा थाने पर तहरीर दी। कहा कि उसकी बेटी दुर्गावती का गांव के ही युवक से प्रेम प्रसंग था। बेटी को डांटा फटकारा गया और गांव की पंचायत में समझौता कराया गया था। आरोप है कि डांटने फटकारने की वजह से 19 जून 2017 को बेटी ने आत्महत्या कर ली। उसके पति तूफानी, उसके भाई दयाराम व ननदोई रामकेश उसकी बेटी की लाश को बोरी में भरकर दाह संस्कार के लिए ले जा रहे थे। जानकारी होने पर उसने पुलिस को सूचना दी। तहरीर के आधार पर आरोपी तूफानी, दयाराम, रामकेश के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई। विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। दौरान विचारण मृतका के आरोपी पिता की मौत हो गई। अभियोजन की ओर से मामले को साबित करने के लिए मृतका की मां पार्वती देवी समेत 12 साक्ष्य प्रस्तुत किए गए तथा दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में 11 साक्षी प्रस्तुत किए गए। साक्षियों ने अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया तथा आत्महत्या के लिए मृतका को दुष्प्रेरित करने तथा बोरी में भरकर लाश को छिपाने की बात किसी साक्षी के साक्ष्य में नहीं आई। चिकित्सक ने कथन किया है कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतका के शरीर पर कहीं भी प्लास्टिक के बोरे के रेशे या निशान नहीं मिले और न ही दिखाई दिए। गले का निशान फंदे से आया है। अभियोजन की ओर से कथनों में ऐसा कोई तथ्य नहीं आया जो यह स्पष्ट करता हो कि आरोपियों के डांटने फटकारने से वादिनी मुकदमा की बेटी दुर्गावती ने आत्महत्या की है। संपूर्ण तथ्यों, परिस्थितियों एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों दयाराम निवासी गंगापुर थाना कलवारी बस्ती तथा रामकेश निवासी तेजपुर थाना धनघटा को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।