- 20 से 25 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे, इलाज के 10 दिन के अंदर संक्रमण समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में इन दिनों टॉन्सिल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस रोग से रोजाना 20 से 25 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। हालांकि की इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। चिकित्सकों का कहना है कि जुकाम, बुखार के बाद गले के दोनों तरफ सूजन आ जाती है। जिससे ये रोग होता है। इलाज के 10 दिन के अंदर संक्रमण समाप्त हो जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि गलसुआ के लक्षण दो सप्ताह बाद नजर आने लगते हैं और दवाओं के सेवन से यह ठीक भी हो जाती है। इसे ठीक होने में 10 दिन का वक्त लगता है। यह बीमारी वायरल के कारण फैलती है। सिरदर्द, बुखार और थकान इसके लक्षण हैं। ध्यान न देने पर गले में सूजन आ जाती है और कुछ भी खाने में दिक्कत होने लगती है। बोलचाल की भाषा में इसे गलसुआ कहते हैं। वैसे इस बीमारी का कोई विशेष उपचार नहीं है। यह बीमारी कुछ दवाओं के सेवन से धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।
इस तरह कर सकते हैं बचाव
- अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लें
- गुनगुने नमक वाले पानी से गरारा करें
- चबाने वाले खाने का सेवन करें
यह है लक्षण
- बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द होना।
- खाने की इच्छा न होना।
- चेहरे पर सूजन के साथ दर्द होना।
- खाना चबाने में परेशानी।
- लार ग्रंथियों में सूजन होना।
टॉन्सिल फैलने का कारण
जिला अस्पताल के सीएम डॉ. भवनाथ पांडेय ने बताया कि यह वायरस से फैलने वाली बीमारी है। यह संक्रमितों के खांसने, छींकने से हवा में फैल जाता है। इसके संपर्क में आने से यह रोग दूसरों में भी फैलता है। इसके अलावा ज्यादा ठंडी वस्तुओं के सेवन से भी टॉन्सिल होता है।