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Sant Kabir Nagar News: पुरुषोत्तम मास का तीसरा सोमवार आज, तामेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालु करेंगे जलाभिषेक

Sun, 06 Aug 2023 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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-पूजा की सामग्री के इंतजाम में जुटे श्रद्धालु, भीड़ को संभालने के लिए बैरिकेडिंग आदि की हुई व्यवस्था
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। पुरुषोत्तम मास के तीसरे सोमवार को तामेश्वरनाथ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इस दौरान मंदिर की परिक्रमा और शिव की आरती का भी आयोजन होगा।

जिले के लोगों के आस्था का केंद्र ऐतिहासिक तामेश्वरनाथ धाम में पुरुषोत्तम मास के तीसरे सोमवार को शिव की आराधना के लिए रविवार की शाम से ही शिवभक्त पूजा की सामग्री के इंतजाम में जुट गए हैं। पूर्व प्रधान नरेंद्र नाथ भारती ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में प्रत्येक दिन भारती परिवार के लोगों के साथ श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा का समापन शिव की आरती के साथ होता है। रविवार से ही कांवड़ियों का जत्था मंदिर परिसर में पहुंचने लगा है। परिसर में कांवड़ियों के ठहरने का इंतजाम किया गया है। मंदिर परिसर में सुरक्षा भी चाक चौबंद रहेगी। महिला और पुरुषों की लाइन के लिए बैरिकेडिंग का कार्य पूरा हो चुका है। परिसर में आने वाले श्रद्धालु शिव की पूजा के बाद मेले में खरीदारी भी करेंगे।
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तामेश्वरनाथ धाम, 350 साल पहले हुआ था मंदिर का निर्माण

संतकबीरनगर। ऐतिहासिक तामेश्वरनाथ धाम शिवभक्तों के लिए किसी तीर्थस्थान से कम नहीं है। अलौकिक और पौराणिक मान्यताओं को समेटे यह धाम सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र रहा है। यहां करीब एक माह तक चलने वाले महाशिवरात्रि मेले में 40 वर्ष पूर्व शादी के रिश्ते भी तय हुआ करते थे। इस मंदिर के देखरेख का जिम्मा यहां रह रहे भारती परिवार संभालते हैं। जो अपनी बारी के हिसाब से मंदिर की देखरेख करने के साथ ही उससे होने वाली आमदनी को खर्च करने के अधिकारी होते हैं। भारती परिवार से ताल्लुक रखने वाले बुजुर्ग बलदेव भारती ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह का निर्माण करीब 350 वर्ष पूर्व बांसी के तत्कालीन राजा ने कराया था। उस समय भारती परिवार के पूर्वज संन्यासी टेकधर भारती को मंदिर की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया था। उन्होंने बताया कि तामेश्वरनाथ में रह रहे भारती परिवार मूल रूप से हरनही तहसील के जैसरनाथ भरोहिया के निवासी हैं। गर्भगृह निर्माण के बाद जैसे-जैसे श्रद्धालु यहां आते गए मंदिर निर्माण का कार्य चलता रहा।

आज परिसर में मुख्य शिव मंदिर सहित करीब सोलह छोटे बड़े शिवालय और हनुमान मंदिर भी है। हर वर्ष श्रावण के महीने में परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचती है। इसी तरह पुरुषोत्तम मास में भी शिव भक्तों का यहां जमावड़ा होता है।

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महात्मा बुद्ध ने यहीं करवाया था अपना मुंडन संस्कार

ग्राम प्रधान नरेंद्र नाथ भारती बताते हैं कि महात्मा बुद्ध ने अपना मुंडन संस्कार यहीं कराया था। ऐसा उनके पूर्वज बताते थे। मंदिर परिसर में स्थित एक अर्धनारीश्वर मंदिर की आकृति भी बुद्ध कालीन मंदिर की तरह है। इसकी जानकारी होने पर पुरातत्व विभाग की टीम ने मंदिर का जायजा लिया था। आज भी लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार यहां कराते हैं।
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द्वापर युग में पांडवों की माता कुंती ने की थी शिवलिंग की स्थापना

हरिहरपुर। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव अपनी माता कुंती के साथ तामेश्वरनाथ धाम पहुंचे थे। जहां शिव की आराधना के लिए कुंती ने शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर से थोड़ी दूर रामपुर में स्थित पोखरे का निर्माण भी पांडवों ने कराया था। उसे द्वापरा के नाम से जाना जाता है। लोगों का मानना है कि पोखरे का निर्माण द्वापर युग में होने से इसका नाम द्वापरा हुआ होगा। पोखरे के निर्माण में प्रयुक्त ईंटें भी अपनी ऐतिहासिकता को बयां करती हैं।
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