संतकबीरनगर न्यूज
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-टीकाकरण सत्र की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले के सरकारी अस्पतालों के साथ ही टीकाकरण सत्र पर निमोनिया से बचाव की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यह वैक्सीन तीन माह से नहीं है। जिससे बच्चों को वैक्सीन नहीं लग पा रही है। अभिभावक बच्चों को लेकर अस्पताल और टीकाकरण सत्र पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। जिससे टीकाकरण सत्र की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। इसके बावजूद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शासन व स्वास्थ्य महकमा टीकाकरण सत्र पर सभी वैक्सीन लगाने के लिए लगातार निर्देश दे रहा है, लेकिन जिले में निमोनिया से बचाव के लिए लगने वाली न्यूमोकोल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) की उपलब्धता नहीं है। यह वैक्सीन एक साल तक के बच्चों को तीन बार लगाया जाता है। इसमें बच्चों को पहला डेढ़ माह, तीन माह और नौ माह की आयु होने पर लगना जरूरी होता है, लेकिन वर्तमान में यह वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इस कारण अभिभावकों को सत्र पर पहुंचने के बाद भी निराश लौटना पड़ रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि यह वैक्सीन अगर छूट गई तो फिर टीका लगाने में दिक्कत आएगी। यही हाल जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भी है। यहां पर निमोनिया से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं है।
निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है। जिससे फेफड़ों में इंफेक्शन हो जाता है। यह बुखार, जुकाम होने के बाद होता है। पांच से छह साल तक छोटे बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया वायरस या फंगस के हमले से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों पर चोट लगने के अलावा खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों के बाद इसकी आशंका बढ़ जाती है।
डॉ. आरपी राय- बाल रोग विशेषज्ञ
अस्पतालों में आ रहे निमोनिया के लक्षण युक्त मरीज
जिला चिकित्सालय सहित सीएचसी व पीएचसी पर प्रतिदिन सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीज आ रहे हैं, जिसमें निमोनिया के लक्षण दिख रहे हैं। अकेले जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन सौ से डेढ़ सौ मरीज पहुंच रहे हैं।
जल्द उपलब्ध हो जाएगी वैक्सीन
निमोनिया से बचाव के लिए लगने वाली वैक्सीन की डिमांड की गई है। उम्मीद है कि 15 मार्च तक यह वैक्सीन जिले में उपलब्ध हो जाएगी। इसके बाद बच्चों को यह वैक्सीन लगाई जाएगी।
डॉ. एस.रहमान, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी