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Sant Kabir Nagar News: सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं

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कथा वाचक निकुंज मंजरी
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धर्मसिंहवा। कथा वाचिका साध्वी निकुंज मंजरी ने भगवान कृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। कहा कि रुक्मिणी का भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम, निर्मल और पूर्ण समर्पण से भरा हुआ था। सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। कथा व्यास ने कहा कि जब जीव में अभिमान आता है तो भगवान उससे दूर हो जाते हैं, लेकिन जब भक्त विरह भाव से पुकारता है तो प्रभु उस पर कृपा करते हैं। उन्होंने बताया कि विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानकर संदेश भेजा था। संदेश पाकर श्रीकृष्ण स्वयं वहां पहुंचे, रुक्मिणी का हरण किया और बाद में द्वारका में विधि-विधान से विवाह संपन्न हुआ। संवाद
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