यहां तो आए दिन होती है तकरार
जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में वसूली का खेल
एक मामले की सीएमएस कर रहे जांच
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में मरीजों से वसूली आम बात है। एक सप्ताह में दो बार मरीजों से वसूली को लेकर बवाल हो चुका है। जेबकतरों का गिरोह भी सक्रिय है। मौका मिलते ही मरीजों व तीमारदारों की जेब साफ कर देते हैं। इस पर नियंत्रण का कोई उपाय अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है।
जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में महिला अस्पताल को स्थानांतरित कर दिया गया है। आरोप है कि यहां तैनात स्टाफ व अन्य कर्मियों की प्रतिदिन किसी ने किसी बात पर मरीजों व तीमारदारों से तकरार होती रहती है। मरीजों से बाहर की दवा खरीदने और ऑपरेशन के नाम पर रकम मांगने की शिकायतें सीएमएस तक पहुंचती रहती हैं।
पिछले माह इमरजेंसी में भी बाहर से सामान मंगाने की शिकायत तीमारदारों ने की थी। सीडीओ ने जांच की और चेतावनी दी थी। उसके बाद भी कर्मियों में सुधार होता नहीं दिख रहा है।
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केस एक
जनता मार्ग निवासी सुनील उपाध्याय की पत्नी को एमसीएच विंग में बच्चा हुआ था। वह 23 नवंबर को टांका कटवाने आए थे। आरोप है कि नर्स ने छह हजार रुपये की मांग की। पीड़ित का आरोप था कि ऑपरेशन के दौरान 16 हजार रुपये का सामान बाहर से मंगा लिया था। इस पर हंगामा हुआ था। सीएमएस मौके पर पहुंचे थे। जांच कराने की बात कही थी।
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केस दो
छह अक्तूबर को बखिरा निवासी अरुण सिंह और अनूप को किसी ने चाकू मारकर घायल कर दिया था। परिजन जिला अस्पताल के इमरजेंसी में लेकर आए थे। आरोप है कि एक चिकित्सक ने बाहर से टांका लगाने के लिए सुई और धागा मंगाया था। इसकी शिकायत डीएम तक पहुंची थी।
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केस तीन
आठ नवंबर को बरदहिया निवासी सुजीत कुमार अल्ट्रासाउंड के लिए आए थे। वह लाइन में लगे तो उनके पाकेट से किसी ने 10 हजार रुपये गायब कर दिए। उन्होंने सीएमएस से शिकायत की, पर कुछ नहीं हुआ।
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केस चार
22 नवंबर को डीघा बाईपास निवासी सुनीता पति के साथ ओपीडी में इलाज कराने आई थीं। उनके पति का किसी ने पर्स चोरी कर लिया। उसमें तीन हजार रुपये थे। सुनीता पुलिस के पास गई तो पुलिस ने सामान पर ध्यान देने की नसीहत देते हुए वापस कर दिया।
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कोट
मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच झड़प हुई थी। एक मामले की वह जांच कर रहे हैं। अस्पताल में ऑपरेशन से संबंधित समस्त संसाधन मौजूद हैं। बाहर से कोई भी सामान की खरीदारी मरीजों को नहीं करनी चाहिए।
-डॉ. ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस