-एंबुलेंस में दरिंदगीः 10 दिन बाद हो सके बयान दर्ज, पीड़िता ने 29 अगस्त की रात का पूरा घटनाक्रम पुलिस को बताया
-मुख्य आरोपी अब भी है फरार, चालक का साथी हो चुका है गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बीते 29 अगस्त को बीमार पति को लखनऊ से बांसी अपने घर लाते समय चलती एंबुलेंस में दरिंदगी की कोशिश की शिकार पीड़िता बुलाने पर भी लखनऊ नहीं जा सकी। उसका बयान लेने लखनऊ के गाजीपुर थाने की पुलिस 10 दिन बाद मंगलवार को उसके गांव पहुंची। पुलिस टीम ने करीब 45 मिनट तक महिला और उसके भाई के बयान दर्ज किए।
मालूम हो कि बयान दर्ज कराने के लिए गाजीपुर पुलिस ने महिला को कई बार थाने बुलाया था, पर कभी तबीयत खराब होने, कभी किराया न होने तो कभी क्रिया कर्म की वजह बताकर वह जा नहीं सकी। एक बार बताया कि लखनऊ के लिए निकली थी, मगर एक समाजसेवी कहीं से कॉल आने पर लौटा ले गए। इस कारण से लखनऊ की टीम में एक दरोगा और एक महिला कॉस्टेबल बयान लेने उसके गांव पहुंचे।
मंगलवार दोपहर बाद पीड़िता के घर पहुंची गाजीपुर पुलिस की टीम ने पहले पीड़िता के बयान लिए। पीड़िता ने बताया कि अस्पताल से पति को डिस्चार्ज कराने के बाद एक निजी एंबुलेंस से 29 अगस्त की शाम करीब 6.30 बजे वे घर के लिए चले। आगे की सीट पर मेरा भाई चालक और उसके साथी के साथ बैठा था, जबकि वह पति के साथ पीछे की सीट पर थी। एक जगह गाड़ी में तेल डलवाने के बाद वे आगे बढ़े और कुछ दूर आगे जाने के बाद गाड़ी रोक दी। उन्होंने मेरे भाई से पीछे और मुझे आगे आकर बैठ जाने को कहा। उनका कहना था कि रास्ते में पुलिस गाड़ी चेक करती है। अगर आगे महिला बैठी रहेगी तो पुलिस नहीं रोकेगी। मैंने मना किया लेकिन बार-बार कहने के बाद आगे की सीट पर बैठ गई। ड्राइवर ने कहा कि फैजाबाद पार हो जाएंगे तो तुमको पीछे बैठा देंगे।
इसके अलावा उसने पुलिस को यह भी बताया कि एंबुलेंस ड्राइवर उसे दूसरे डॉक्टर के पास ले जाने को कहने लगा। उसने किसी डॉक्टर से बात करने को कह कर फोन पकड़ा दिया। डॉक्टर ने कहा कि तुम वापस लखनऊ चली आओ और अपने पति को भर्ती कर दो। जांच के पैसे नहीं लगेंगे, केवल दवा के लगेंगे। महिला ने कहा मेरे पास अब पैसे नहीं बचे हैं, क्योंकि मैं अपना खेत तक बेच चुकी हूं। उसके कुछ देर बाद ही एंबुलेंस ड्राइवर और उसका साथी छेड़खानी करने लगे। ऐसा करते-करते वे फैजाबाद पहुंच गए। वहां एक ढाबे पर चालक और उसके साथी ने खाना खाया। शायद दोनों ने शराब भी पी, फिर ड्राइवर उसकी बगल में आकर बैठ गया और हेल्पर एंबुलेंस चलाने लगा। दोनों ने फिर छेड़खानी शुरू कर दी। वह बचने के लिए हाथ-पैर चलाने लगी तो पीछे बैठे भाई को भी कुछ शक हुआ। वह भी शोर मचाने लगा। इस बीच बार-बार परिजनों का फोन आ रहे था, इसलिए मोबाइल छीन लिया। बस्ती में प्रगति पौधशाला के पास गाड़ी रोक ली। दोनों ने मुझे पीछे और भाई को आगे बैठने को कहा। जैसे ही भाई आगे बैठा उन्होंने उसे लॉक कर दिया और दोनों मेरे साथ दुष्कर्म की कोशिश करने लगे। असफल होने पर पति का ऑक्सीजन मॉस्क निकाल कर मुझे व पति को एंबुलेंस से नीचे धकेल पर भाई को भी उतार कर सामान व नकदी लेकर भाग निकले।
बस्ती पुलिस के बारे में बताया
पीड़िता ने पुलिस को बताया की बस्ती में छावनी इलाके में एंबुलेंस चालक और उसके साथी के भागने के बाद शोर सुनकर पौधशाला से एक बुजुर्ग मदद के लिए आए। उन्होंने मेरे पति को पानी पिलाया और चारपाई लाकर उसी पर लिटा दिया। मेरे भाई ने 108 नंबर एंबुलेंस को बुलाया उसके बाद डॉयल 112 को फोन किया। तब तक हम 108 की एंबुलेंस आ गई तो उसमें बैठ गए। इस बीच 112 नंबर की गाड़ी आई और मेरा बयान दर्ज किया। कहा कि आप पहले अपने पति को अस्पताल में भर्ती करवाओ। उसके बाद अपनी शिकायत पुलिस को दर्ज करवाना। मैं अपने बीमार पति को वहां से लेकर जिला अस्पताल बस्ती पहुंची, जहां पर उनकी हालत गंभीर देखकर डॉक्टर ने रेफर कर दिया और गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। डायल-112 के कहने पर थाने गई, लेकिन पुलिस ने छावनी की बजाय लखनऊ के गाजीपुर थाने में केस दर्ज कराने के लिए भेज दिया।
बोले विधि विशेषज्ञ
महिला से जुड़े अपराध में पुलिस को तत्काल केस दर्ज करना चाहिए था। इतने बड़े अपराध में पुलिस आनाकानी करती है जो वह भी एक प्रकार से अपराध है। अगर छावनी या फिर गाजीपुर पुलिस यह मान रही थी कि उसके यहां घटना नहीं हुई है तो यह टालने वाला कार्य है। केस कहीं दर्ज होता, विवेचना के लिए संबंधित थाने में ट्रांसफर हो जाता। बीएनएस में जीरो एफआईआर की व्यवस्था हो गई है। इसके तहत केस दर्ज करना चाहिए था। पुलिस ने हर कदम पर लापरवाही की है।
संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता, अपराध, जनपद न्यायालय