नगर पंचायत हरिहरपुर मे श्रीमद्भागवत कथा सुनाते आचार्य देवव्रत जी महराज
हरिहरपुर। नगर पंचायत हरिहरपुर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य देवव्रत ने श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि जब देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होता है तब देवकी वासुदेव की बेड़ियां खुल जाती हैं। अलौकिक प्रकाश होता है सभी पहरेदार सो जाते हैं तब जगत का पालनहार एक अद्भुत बालक के रूप में जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण प्रकट नहीं हुए थे उन्होंने जन्म लिया था। यद्यपि भगवान राम प्रकट हुए थे। उन्होंने गोस्वामी जी की चौपाई को उद्घृत किया कि ''''भय प्रकट कृपाला दीन दयाला''''लेकिन श्रीकृष्ण जी ने इसलिए जन्म लिया था क्योंकि उन्होंने गर्भ को वचन दिया था। इसलिए उन्होंने देवकी के गर्भ से जन्म लिया। आचार्य देवव्रत ने ईश्वर शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि जो सब कुछ करने में समर्थ है वही है कृष्ण। भगवान कृष्ण कहते हैं कि अन्य अवतार मेरे अंशावतार हैं लेकिन श्रीकृष्ण पूर्ण अवतारी हैं। उन्होंने अवतार और अवतारी शब्द के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अवतारी संपूर्ण ईश्वर की व्याख्या है। भगवान श्रीकृष्ण जन्म लेते हैं तो वासुदेव जी उन्हें लेकर गोकुल के लिए चल देते हैं। रास्ते में यमुना जी पड़ती हैं जैसे जैसे वासुदेव जी यमुना को पार करने लिए यमुना में प्रवेश करते हैं। उसी समय भगवान कृष्ण का चरण छूने के लिए यमुना जी का पानी तेजी से उपर आता है। जैसे ही भगवान अपना चरण यमुना को स्पर्श करते हैं पानी नीचे चला जाता है। वासुदेव जी भगवान को नंद के घर लेकर पहुंचते हैं। कथा के दौरान मुख्य यजमान आशुतोष पांडेय, शक्ति कुमार पांडेय, अनिमेश पांडेय सहित कई लोग मौजूद रहे।