हरिहरपुर। नगर पंचायत हरिहरपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य देवव्रत ने कपिल भगवान के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि माता सुनीति, ध्रुव से लौकिक पिता की गोद में बैठने से मना करते हुए अलौकिक पिता की गोद में बैठने की बात कहती हैं। उन्होंने ध्रुव को भगवान की महिमा बताई और कहा कि कैसे पिता की गोद से ऊंचा स्थान प्राप्त हो सकता है। ध्रुव जी भगवान के दर्शन प्राप्त करने के लिए घर से निकल जाते हैं। रास्ते में उन्हें नारद जी मिलते हैं जब ध्रुव नारद को प्रणाम करते हैं तब नारद उनकी विनम्रता देख द्रवित हो जाते हैं और भगवान के मिलने की युक्ति बताते हैं। ध्रुव का दृढ़ संकल्प देखकर नारद चकित होते हैं। गुरु और दीक्षा की बात पूछते हैं तब ध्रुव ने कहा मैं तो दीक्षा नहीं जानता हूं। लेकिन मैं आपको अपना गुरु बनाना चाहते हैं।नारद उनका गुरु बनकर ध्रुव को शिक्षा देते हैं। उसके बाद दीक्षा देते हैं। फिर भगवत प्राप्ति के साधन बताते हैं। कथा व्यास ने कहा कि किसी को उसका चमत्कार देखकर गुरु नहीं बनाना चाहिए। गुरु भगवान को प्राप्त करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के कोई भवसागर पार नहीं कर सकता है। इस मौके पर आशुतोष पांडेय, शक्ति कुमार पांडेय, अनिमेश पांडेय आदि मौजूद रहे।