मेंहदावल। क्षेत्र के संस्कार मंडप में रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने गुरु दक्षिण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें डॉ. राघवेंद्र प्रताप रमन ने कहा कि गुरु दक्षिणा शब्द का प्रयोग हमारे प्राचीन काल में अपने गुरु को वापस लौटाने से लिया जाता है। आज की दुनिया में शिक्षण को लेकर अवधारणाएं बदल गई हैं और शिक्षक-छात्र संबंध भी व्यावसायिक होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक या गुरु के महत्व को किसी भी दृष्टि से कम नहीं आंका जा सकता है। वास्तव में ऐसा होना भी नहीं चाहिए। एक शिक्षक वह व्यक्ति होता है जो वास्तव में आपके शैक्षणिक विकास के लिए जिम्मेदार होता है और वह व्यक्ति होता है जो वास्तव में आपके लक्ष्यों तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है। इस अवसर पर अनूप सिंह, वैभव शुक्ला, प्रहलाद कुशवाहा, राकेश कुमार, शोभनाथ गुप्त, शैलेश मणि त्रिपाठी, राम प्रकाश राय, सर्वेश त्रिपाठी, सत्यव्रत मिश्र आदि मौजूद रहे।