संतकबीरनगर। जिले में आत्महत्या का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। आए दिन किसी न किसी कारण की वजह से लोग आत्महत्या कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में चार लोगों ने मौत को गले लगा लिया। इसमें सबसे ज्यादा पारिवारिक विवाद और तनाव की वजह से मौत के मामले सामने आ रहे हैं।
आत्महत्या के मामलों में हो रही लगातार बढ़ोतरी पुलिस का भी सिरदर्द बढ़ा रही है। तमाम लोग पारिवारिक विवाद व अन्य कारणों से मानसिक तनाव में आकर अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं। हर तरफ से नाकामी दिखने पर आत्मघाती कदम उठा ले रहे हैं। उन्हें न तो अपने घर परिवार का ही ख्याल रह जाता है और न ही उनके पीछे परिवार के हालत की कोई चिंता रहती है। ऐसे में समाज से बेपरवाह लोग जहरीला पदार्थ खाकर अथवा फंदा लगाकर आत्मघाती कदम उठा ले रहे हैं। जिले में पिछले कुछ दिनों में आत्महत्या के मामलों की बढ़ोतरी हुई है।
केस एक
- 11 मई को मेंहदावल थाना क्षेत्र के औरही गांव निवासी मोनी ने आत्महत्या कर लिया। आरोप है कि उसके परिवार के ही लोग लगातार परेशान कर रहे थे। इससे तंग आकर आत्मघाती कदम उठाया।
केस दो
-14 मई को महुली थाना क्षेत्र के हरिहरपुर कस्बा में व्यापार पुत्र सूरज का शव फंदे से लटकता हुआ पाया गया। उसका अपने ही गोदाम में रस्सी के सहारे शव लटकता हुआ मिला था।
केस तीन
- 15 मई को धनघटा थाना क्षेत्र के गागरगाड़ गांव में एक युवक ने अपने घर पर ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर लिया। युवक का अपनी पत्नी के साथ तलाक हो गया था। इसके बाद से ही वह अवसाद में चल रहा था।
केस चार
-16 मई को बेलहरकला थाना क्षेत्र के परासी गनवरिया गांव निवासी रघुवीर ने अपने ही घर के भीतर फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। परिजन जब उसको खाना खाने के लिए बुलाने गए तो मामले की जानकारी हो पाई
आज समाज में आत्महत्या की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। इसके पीछे अनेक जटिल कारण हैं। इसमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, शैक्षणिक दबाव, सामाजिक आर्थिक समस्याएं, प्रेम संबंधों में विफलता, व्यसन और घरेलू हिंसा आदि प्रमुख हैं। भारत में युवाओं पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ काफी ज्यादा है, लेकिन उनमें से ज्यादातर इसका उपचार नहीं कराते। परीक्षाओं में सफलता का अत्यधिक दबाव, अभिभावकों और शिक्षकों की अपेक्षाएं और विफलता का डर युवाओं को आत्महत्या की ओर धकेल रहा है। इसके साथ ही भौतिकता की अंधी दौड़ में कहीं ना कहीं व्यक्ति मौलिकता से दूर होता जा रहा है और दिखावे की संस्कृति में वह हताश और अपने को अकेला महसूस कर रहा है जिसके कारण वह आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहा है।
- डॉ विजय मिश्र, असिस्टेंट प्रोफेसर, समाज शास्त्र विभाग, एचआरपीजी कॉलेज