कहीं शौचालय खस्ताहाल तो, कहीं हैंडपंप दे रहे दूषित पानी
प्राथमिक विद्यालय डिघवा और खटियावा में बदहाली के साये में पढ़ रहे बच्चे
- बाउंड्रीवॉल नहीं बनने से बच्चों को सुरक्षा का खतरा, पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी
बेलहर। परिषदीय स्कूलों की दशा सुधारने के लिए भले ही कायाकल्प योजना चलाई गई, लेकिन स्कूलों के हालात जस के तस बने हुए हैं। कहीं विद्यालय के शौचालय बदहाल हैं तो कहीं हैंडपंप खराब हैं। विद्यालयों में बाउंड्रीवॉल नहीं बनी है। अभी बच्चे पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय डिघवा के परिसर में बना शौचालय का दरवाजा टूटा है। जिससे बच्चों व शिक्षकों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है। विद्यालय की बाउंड्रीवॉल चारों तरफ से टूटकर गिर चुकी है। हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। प्रधानाध्यापक करुणेश्वर पटेल ने बताया कि विद्यालय का भवन भी जर्जर हो गया है। बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। यहां 74 बच्चे नामांकित हैं, जबकि 70 बच्चे उपस्थिति मिले। उन्होंने बताया कि बाउंड्रीवॉल, शौचालय और भवन निर्माण के लिए कई बार खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित रूप में दिया गया है, लेकिन अभी तक कायाकल्प के तहत कोई भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
प्राथमिक विद्यालय खटियावा के परिसर में बाउंड्रीवॉल नहीं बनी है। जबकि विद्यालय के समाने पोखरा है। प्रधानाध्यापक राजेश कुमार मौर्या ने बताया कि यहां 150 बच्चे नामांकित हैं और मौके पर 145 बच्चे उपस्थित थे। उन्होंने ने बताया कि हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। मजबूरी में बच्चे व शिक्षक दूषित पानी पी रहे हैं। विद्यालय के सामने पोखरा होने से आए दिन डर बना रहता है कि कहीं कोई बच्चा पोखरे में गिरकर डूब न जाएं। कई बार खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित पत्र दे चुके हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।
प्राथमिक विद्यालय देवपुर के परिसर में बना शौचालय झाड़ियों में तब्दील हो गया है। विद्यालय के पीछे आमी नदी है और स्कूल की चहारदीवारी नहीं है। प्रधानाध्यापक मुहम्मद समीम ने बताया कि यहां 130 बच्चे नामांकित हैं और मौके पर 95 बच्चे उपस्थित हैं। उन्होंने ने बताया कि कई बार समस्या के संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी को पत्र दिया गया, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई, सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। शौचालय के लिए शिक्षक व बच्चों को मजबूरन बाहर जाना पड़ता है।
पूरे जिले में दो लाख किताबें आ गई हैं। जल्द ही सभी विद्यालयों में किताबें पहुंच जाएंगी और बच्चों में वितरित करा दिया जाएगा। जहां-जहां बाउंड्रीवॉल, शौचालय, हैंडपंप आदि की समस्या है, वहां जल्द ही समस्या को दूर किया जाएगा। जर्जर भवानों की जगह नए भवन बनवाए जाने की दिशा में प्रयास होगा।
अतुल कुमार तिवारी, बीएसए