संतकबीरनगर जिले में बीडीओ नाथनगर की कारगुजारी भी गजब की है। डीसी मनरेगा ने कोडरी में जेसीबी से तालाब की खोदाई की सूचना मिलने पर बीडीओ नाथनगर अमरेश सिंह चौहान को फोन पर जांच करने के लिए अवगत कराया तो बीडीओ का जवाब था कि इस तरह तो हर जगह जेसीबी चल रही है, मैं कहां तक जांच करता फिरूंगा। सीडीओ ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ को नोटिस जारी करके दो दिनों के भीतर जवाब मांगा है। इसके साथ ही कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास को पत्र भेजे जाने की चेतवानी दी है।
विकास खंड नाथनगर के भगवान पूर्वी के विजय शंकर राय आदि ने आयुक्त ग्राम्य विकास से मनरेगा की गाइड लाइन के विपरीत कार्य कराए जाने की शिकायत की गई थी। इस मामले में सीडीओ की ओर से निर्देशों का पालन न करने और भ्रामक आंख्या प्रेषित किए जाने के संबंध में उपायुक्त श्रम रोजगार को कठोर चेतावनी निर्गत की गई। जबकि इस प्रकरण के निस्तारण के लिए उपायुक्त श्रम एवं रोजगार की तरफ से बीडीओ अमरेश सिंह चौहान को कई बार निर्देश दिए गए थे। दो जुलाई को बीडीओ से रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन बीडीओ ने 12 बजे तक आंख्या प्रस्तुत नहीं की। जिसकी वजह से आयुक्त ग्राम्य विकास के पत्र का अनुपालन नहीं हो पाया।
सीडीओ संत कुमार ने बताया कि बीडीओ के जरिये पूर्व में भी जन शिकायतों के प्रकरण में इसी तरह की लापरवाही बरती गई है। नाथनगर में ऐसी शिकायतें निरंतर मिलती है कि जेसीबी और ट्रैक्टर आदि से पूर्व में काम करा लिया जाता है और उसके बाद मनरेगा से आईडी सृजित कराते हुए केवल भुगतान की कार्रवाई कराई जाती है। पांच जून को डीसी मनरेगा ने बीडीओ को सूचना दिया था। बावजूद इसके अतरौलिया उर्फ मठिया में बिना आईडी सृजन के 500 मीटर का संपर्क मार्ग का कार्य जेसीबी से करा लिया गया।
छह जून को सर्वाधिक मजदूर नियोजित होने के कारण पांच ग्राम पंचायतों में सीडीओ ने जनपद स्तरीय टीम भेजकर जांच कराया। जांच में कार्यस्थल पर 1215 मजदूर के सापेक्ष मात्र 42 मजदूर ही पाए गए। 18 जून को ग्राम पंचायत कोडरी में जेसीबी से तालाब खोदाई की सूचना मिलने पर डीसी मनरेगा ने बीडीओ को जांच करने के लिए निर्देश दिया तो बीडीओ ने संज्ञान न लेकर यह कहा कि इस तरह तो हर जगह जेसीबी चल रही है, मैं कहां तक जांच करता फिरूंगा।
22 जून को फिर ग्राम पंचायत बरौली में लगातार जेसीबी से खोदाई की सूचना मिली। पुन: डीसी मनरेगा ने बीडीओ को दो दिन में खुद कर जांच करके रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। लेकिन बीडीओ ने ऐसा करना उचित नहीं समझा।
सीडीओ ने बताया कि बीडीओ के स्तर से मनरेगा योजना के दिशा निर्देशों एवं उच्चाधिकारियों के आदेशों की निरंतर अवहेलना की जा रही है। जबकि मनरेगा में मशीनों से कार्य करना वर्जित है। बीडीओ का यह कथन कि इस तरह तो हर जगह जेसीबी चल रही है, मैं कहां तक जांच करता फिरूंगा दायित्व के प्रति लापरवाही को परिलक्षित करता है।
इससे यह भी स्पष्ट है कि विकास खंड क्षेत्र में जो भी कार्य जेसीबी या ट्रैक्टर से कराए गए हैं या कराए जा रहे हैं। वह बीडीओ के संरक्षण में कराया गया है। इसमें संपूर्ण रूप से बीडीओ की संलिप्तता प्रदर्शित हो रही है। बीडीओ को नोटिस जारी करके दो दिनों में जवाब मांगा गया है। इन्हें चेतावनी दी गई है कि क्यो न इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास को अवगत करा दिया जाए।