संतकबीरनगर। दीपावली के दिन तीन करोड़ के पटाखे बिक गए। जगह-जगह लोगों ने पटाखे फोड़ कर दीपावली मनाई। इतनी संख्या में पटाखों से निकले धुएं से प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया। रविवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 163 रहा।
दिवाली को लेकर जिले में पटाखे की 76 दुकानों के लिए लाइसेंस मिला था। खलीलाबाद में 46 दुकानें जूनियर हाईस्कूल में लगी थीं। दीपावली के दिन देर शाम तक कुल तीन करोड़ के पटाखे की बिक्री की बात दुकानदारों ने बताई। इसी तरह से मेंहदावल, धनघटा, बखिरा, मगहर, सेमरियावां में भी पटाखे की बिक्री हुई। देर शाम तक लोगों ने पटाखे फोड़े। पटाखे के बारूद से निकले धुआं ने प्रदूषण का स्तर बढ़ा दिया। दिवाली पर पूरे दिन धुंध छाया रहा। प्रदूषण पर अंकुश की लाख कवायदों के बीच पटाखे का शोर और धुआं शहर में वायु प्रदूषण के हालात और बदतर कर दिया। देर रात तक पटाखा फोड़ने का क्रम जारी रहा।
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कुछ दिन तक बच कर रहें
दिवाली पर आतिशबाजी हुई। देर रात तक लोग पटाखा फोड़ते रहे। बारूद से बने पटाखा पर्यावरण के लिए घातक है। इससे हानिकारक प्रदूषक जैसे की नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइड्स, क्लोराइड्स, अमोनिया के जल में घुलनशील आयन उत्पन्न होते है, साथ ही विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते है ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है। लोगों को कुछ दिनों तक बच कर रहने की जरूरत है। बारूद से निकले धुएं से ब्लैक कार्बन उत्सर्जन से अस्थमा जैसे रोग के कारक बनते हैं। इसलिए लोगों को पटाखे से दूरी बनानी चाहिए थी। -डॉ. नेहा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, एचआरपीजी कॉलेज
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हार्ट के मरीज व बच्चे मास्क जरूर लगाएं
दिवाली पर पटाखे फोड़े गए हैं, इससे काफी मात्रा में धुआं निकला है। यह लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालेगा। बारूद के पटाखों में पोटेशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैसें निकलती हैं। चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हार्ट के मरीजों बच्चों को समस्या होगी। ऐसे में इन लोगों को बच कर रहने की जरूरत है और मास्क लगाना ही बेहतर उपाय है। -डॉ. महेश प्रसाद, वरिष्ठ फिजीशियन