रोसयाबाजार। पौली के बाबा कंकड़ेश्वर नाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास आचार्य पराशर ने कहा कि श्रीमद्भागवत अलौकिक ग्रंथ है। श्रीमद्भागवत कथा से मानव को आदर्श जीवन जीने की सीख मिलती है। कथा श्रवण व अनुसरण से मानव मर्यादा की मिसाल पेश कर समाज को सीख दे सकता है।
कथा व्यास ने कहा कि वेद व्यास जी रचित श्रीमद्भागवत पुराण अलौकिक ग्रंथ है। इसमें 18 स्कंधों में अट्ठारह हजार श्लोकों को लिपि वद्ध करके एक आदर्श जीवन जीने की सारी कलाओं को भर दिया है। धुंधकारी व गोकर्ण की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि पुत्र की कामना ने आत्मदेव व पत्नी धुंधी को इतना आसक्त कर दिया कि दोनों अपने कर्तव्य से भटक गए। उसका परिणाम रहा कि गोकर्ण व धुंधकारी दोनों भाइयों के स्वभाव व आचरण में काफी अंतर हो गया। धुंधकारी जहां गलत लोगों के साथ पड़ गया और गोकर्ण संस्कारी बन गया। इस मौके पर विकास, उमेश सिंह, लुटावन सिंह, सुमंत राव, कृष्ण चंद मांझी आदि मौजूद रहे।