मगहर। सद्गुरु कबीर की परिनिर्वाण स्थली परिसर में बने ताना-बाना हाल में पुरातत्व विभाग की तरफ से आयोजित संगोष्ठी में कबीर कहीं नहीं दिखे। इसे लेकर संतों में गहरा रोष व्याप्त है।
संत कबीर की परिनिर्वाण स्थली मगहर परिसर में उनका 625 वां प्राकट्य दिवस मनाया जा रहा है। जिसे भव्यता प्रदान करने के लिए विभिन्न विभागों के द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश पुरातत्व गोरखपुर इकाई के द्वारा वर्तमान परिवेश में कबीर की जरूरत विषय पर शनिवार को गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान कार्यक्रम के लिए बने बैनर व कार्यक्रम में कबीर का चित्र नहीं दिखा। जो कार्यक्रम के दौरान चर्चा का विषय बना रहा। इस विषय पर वार्ता करने पर कबीर चौरा मठ के महंत विचार दास ने कहा कि कार्यक्रम में पुरातत्व विभाग की लापरवाही सामने आई है। इसमें कबीर को उनके ही जन्मोत्सव पर गुमनाम कर दिया गया। इनके जन्मोत्सव पर उन्हें ही बेगाना बना दिया है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। इससे संत समाज को गहरा आघात लगा है। ऐसी गलती दोबारा न हो, इससे विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
डॉ. अरविंद दास शास्त्री ने बताया कि विश्व में कबीर की अपनी एक अलग पहचान है। जिनका अपने उत्सव में ही दरकिनार होना निंदनीय है। संत केशव दास ने कहा कि पूरा परिसर कबीर के नाम से जाना जाता है। इसका विकास करना हम सबका दायित्व है। जिनके जन्मोत्सव पर बैनर पर कबीर साहेब का चित्र न लगना समझ से परे है।
संत डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहा कि पुरातत्व विभाग के संरक्षण में कबीर चौरा परिसर संरक्षित है। इसका मतलब यह नहीं है कि कबीर साहेब के जन्मदिवस पर उनको दरकिनार करके कार्यक्रम किया जाए। उन्होंने कहा कि कबीर चौरा परिसर में कार्यक्रम और कबीर साहेब का चित्र और बैनर पर महंत विचार दास का न होना अपमान की बात है।
इस मामले में प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी गोरखपुर राम विनय ने बताया कि यह बड़ी चूक हो गई, जिसका अहसास विभाग को है, लेकिन इस गलती को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। जो समर्पित लोग हैं वे निंदा नहीं सुझाव देते हैं।