एचआरपीजी कॉलेज में शिक्षक की भूमिका विषयक आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते वक्ता।संवाद
संतकबीरनगर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन बुधवार को एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद में किया गया। अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर प्रताप विजय कुमार ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका समाज व राष्ट्र के प्रति सदैव चुनौतीपूर्ण रही है। प्राचीनकाल से ही शिक्षक का दायित्व समाज के प्रति अमूल्य माना जाता रहा है। अध्यापक के रूप में यदि हम अपने कार्य का निष्ठापूर्ण संपादन कर रहे हैं, तो समाज हमारा मूल्यांकन हमेशा अच्छे नजरिये से करता है।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर दिग्विजय नाथ पांडेय ने कहा कि कक्षा में निरंतर कम हो रही छात्रों की संख्या को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 कार्यान्वित की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समाज और समय की आवश्यकता के अनुरूप वह सब कुछ है, जो शिक्षा के साथ रोजगार और व्यवसाय प्रदान कर सकता है। एक आदर्श शिक्षक वह है जो अपने विद्यार्थियों में भेदभाव नहीं करता है। राधाकृष्णन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक अध्यापक छात्रों का रोल मॉडल होता है। शिक्षक की प्रतिष्ठा और छवि का निर्माण एक विद्यार्थी ही करता है। आज का शिक्षक नौकरी करता है, अध्यापन नहीं। यही कारण है कि अब उसे समाज की अपेक्षा पर खरा उतरने के लिए प्रयास करना पड़ता है, अन्यथा अपने तकनीकी कौशल से अध्यापन वृत्ति को चुनने वाला समुन्नत राष्ट्र को विकसित करने और छात्रों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित करने में सर्वदा सफल होगा।
इस मौके पर संयोजक प्रोफेसर विजय कुमार राय, विभागाध्यक्ष डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह, डॉ. अर्चना मिश्रा, आशीष कुमार, प्रभा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार त्रिपाठी, डॉ. अमर नाथ पांडेय आदि ने भी विचार रखे।