खतरे के निशान से एक मीटर नीचे बह रही नदी, सीमावर्ती गावों के लोग चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। सरयू का जलस्तर फिर से बढ़ना शुरू हो गया है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 40 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। बिड़हरघाट में शनिवार को नदी का जलस्तर 78.400 दर्ज किया गया है। खतरे के निशान 79.4000 से करीब एक मीटर नीचे नदी बह रही है। जलस्तर बढ़ने से मांझा क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
सरयू में उफान से निकटवर्ती गांवों के ग्रामीणों में चिंता बढ़ने लगी है। बिड़हरघाट पर नदी का दबाव बढ़ना शुरू हो गया है। नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। लेकिन नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए मांझा के निकटवर्ती गांवों के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
दूसरी तरफ क्षेत्र में मूसलाधार बारिश से कुआनो में भी उफान शुरू हो गया है। मांझा क्षेत्र में अधिकांश फसलें पहले ही बाढ़ में प्रभावित हो चुकी है। तुरकौलिया, तेजपुर, तिघरा, ढोल बजा, दौलतपुर, चपरा पूर्वी, खाले पुरवा, कुर्मियान टोला, छपरा मगर्वी समेत दो दर्जन गांव के ग्रामीण पिछले एक माह से बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोबारा बाढ़ आने के संकेत से ग्रामीणों की नींद गायब हो गई है।
बिड़हरघाट में नदी का दबाव शवदाह गृह के करीब बना हुआ है। तुरकौलिया स्थित एमबीडी तटबंध पर नदी का दबाव बना हुआ है। मांझा क्षेत्र निवासी लालचंद, राम शरीक, दिनेश चौहान, राम रेखा, संजय कुमार, चन्द्रकेश आदि ने बताया कि पिछली बाढ़ में धान, धान, अरहर और तिल की फैसले जलमग्न होकर बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ आपदा से प्रभावित दस हजार की आबादी इन दिनों अनेक समस्याओं से जूझ रही है। क्षेत्र के छपरा मगर्वी, कुर्मियान टोला, खाले पूरवा, चपरा पूर्वी, खरगपुर, दौलतपुर, कंचनपुर आदि दो दर्जन से अधिक गांव के सिवानों में खरीफ की फसलें में पानी में डूब गई है। खाले पुरवा निवासी अशर्फीलाल, राम भजन, लोरिक, रामानंद, जितेंद्र, रवि कुमार आदि ने बताया कि पिछले 24 घंटे से नदी का जलस्तर बढ़ने से बची खुची फसलों पर खतरा मंडराने लगा है।
इस संबंध में एसडीएम धनघटा रमेश चंद ने बताया कि नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थित नहीं आई है। फसलों के हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।