संतकबीरनगर। पेरिस ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ी कुश्ती, निशानेबाजी और भाला फेंक में पदक जीतकर एक बार फिर खुद को साबित किया। बेहतर सुविधाएं, निरंतर अभ्यास और सही गाइडेंस से उन्हाेंने यह उपलब्धि हासिल की। मगर इस मामले में जिले में स्थिति ठीक नहीं हैं। यहां खिलाड़ी निरंतर अभ्यास तो कर रहे हैं, लेकिन स्टेडियम में न तो उन्हें गाइड करने के लिए कोच है और न ही प्रशिक्षण की सुविधाएं ही हैं। खिलाड़ी खुद के दम स्टेट और नेशनल स्तर पर पदक जीत रहे हैं।
जिले में वर्ष 2010 में काशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण हुआ। 14 साल बाद भी यहां केवल बास्केटबाल, हैंडबाल और कुश्ती तथा एथलेटिक्स के ही कोच है। एथलेटिक्स का हाल यह है कि ट्रैक पर बारिश का पानी लगने से स्थिति खराब हो जाती है। दम बढ़ाने के लिए दौड़ने वाले खिलाड़ियों के चोटिल होने का भी खतरा बढ़ जाता है। स्टेडियम में वालीबाल, फुटबाॅल, हाॅकी, बैडमिंटन, क्रिकेट, कबड्डी, निशानेबाजी में कोच ही नहीं है। जबकि, इसके इन खेलों के खिलाड़ी नियमित स्टेडियम आते है। बैंडमिंटन कोर्ट तो है, लेकिन कोच न होने से खिलाड़ी खुद ही अभ्यास कर चले जाते हैं। स्टेडियम में वालीबाल का कोर्ट नहीं है। कबड्डी के लिए कोई कोर्ट नहीं बनाया गया है।
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स्टेडियम में हॉकी के लिए कोई कोच नहीं है। इसके साथ ही हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभ्यास करने में दिक्कत होती है।
प्रिंस यादव, हाॅकी खिलाड़ी
फुटबाल के लिए कोई कोच न होने से अभ्यास के लिए परेशानी हो रही है। इसके साथ ही परिसर में फुटबाल के लिए कोई अलग मैदान भी नहीं है। किसी तरह से वह लोग अभ्यास करते है।
रोहन यादव, खिलाड़ी
कोच की कमी से निदेशालय को अवगत करा दिया गया है। फिर भी जो खिलाड़ी आते है उनका अन्य कोच के माध्यम से अभ्यास कराया जाता है। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है।
दिलीप कुमार, उप क्रीड़ा अधिकारी