संतकबीरनगर। मानसून आने में विलंब भले ही है, लेकिन बारिश का होना भी तय है। घाघरा, कुआनों, कठिनइया नदियों की बाढ़ से बचाव के लिए बना एमबीडी, कल्याण पट्टी- प्रजापतिपुर तटबधों की हालत मरम्मत न होने की वजह से बदतर है। वर्ष 2013 में बाढ़ ने घाघरा तुर्कवलिया नायक के पास बांध को काट दिया था, जिससे बड़ी तबाही मची थी। गांव वाले बताते हैं कि नदी यदि बांध पर दबाव बनाती है तो वह कमजोर होने से टूट सकता है। इससे हैंसर बाजार और पौली ब्लॉक के 300 से अधिक गांव में बाढ़ का पानी तबाही मचा सकता है।
जिले की धनघटा तहसील क्षेत्र में आने वाले गांवों को घाघरा नदी की बाढ़ की तबाही से बचाने के लिए रामपुर- बहरा डाड़ी बांध का निर्माण करीब 32 किलोमीटर की लंबाई में हुआ है। बांध तो पिच कर दिया गया है, लेकिन कई स्थानों पर नदी छोर की तरफ होल और रेन कट बने हैं। नारायनपुर गांव के पास बांध पर बना होल बांध के कमजोर होने का सबूत दे रहा है। मदरा गांव के पास भी बांध पर रेन कार्ड बना हुआ है, जिसमें मिट्टी भरा जाना गांव के लोग आवश्यक बता रहे हैं।
तुरकौलिया नायक के पास वर्ष 2013 में नदी ने बांध को तोड़ दिया था। करीब 800 मीटर की लंबाई में टूटे बांध का निर्माण किया गया था। उसे बोल्डर से पिच भी किया गया, लेकिन पिछले वर्ष नदी की बाढ़ का दबाव जब बांध पर बढ़ा तो वह एक बार फिर बांध टूटने के कगार पर पहुंच गया था, जिसे बचाने के लिए सिंचाई विभाग के लोगों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा था। जगदीशपुर और औराडाड गांव के मध्य बांध पर कई जगह होल की बात गांव के लोग बता रहे हैं।
ग्रामीण मदरा निवासी सभापति, रामजीत, कृष्णचंद,रामफेर आदि बताते हैं कि इस वर्ष बांध पर एक भी छंटाक मिट्टी कहीं पर नहीं डाली गई, जिससे बांध जिस हालत में जहां था, उसी हालत में पड़ा हुआ है। कुआनों नदी की धारा को रोकने के लिए कल्याण पट्टी- प्रजापति पुर बांध का निर्माण हुआ है। इस बांध पर भी रेन कट और होल जगह-जगह बने होने की बात गांव के लोग बता रहे हैं। मरम्मत न होने से ग्रामीण भयभीत हैं।
यह कैसी मरम्मत, जगह-जगह चूहों का बिल
मेंहदावल। तहसील क्षेत्र मेंहदावल के पूर्वी उत्तरी दिशा में राप्ती नदी के किनारे करमैनी बेलौली तटबंध की कुल दूरी 19.2 किलोमीटर है। वर्ष 2021-2022 में बेलौली अति संवेदनशील कटान पर परियोजनाओं की स्वीकृति के साथ ही तटबंध के उच्चीकरण व चौड़ीकरण के लिए शासन ने करीब 10 करोड़ रुपये अवमुक्त किया था। डुमरिया गांव निवासी दयासागर यादव ने बताया कि करोड़ों रुपये की लागत से तटबंध के चौड़ीकरण व उच्ची करण का कार्य होना था, लेकिन ठेकेदारों ने बंधे का टॉप छिलवा कर स्लोप बनवा दिया और भुगतान उठा लिया, जबकि हम लोगों के गांव के समीप ही बंधे में जगह-जगह बने रेनकट होल विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। करमैनी बेलौली तटबंध की हालत खराब है, यदि इस बरसात में राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ा और तटबंध पर दबाव जलस्तर का पड़ा तो बाढ़ की संभावना प्रबल होगी।
वहीं राहुल चौधरी ने बताया कि करमैनी बेलौली तटबंध पर कई अति संवेदनशील कटान स्थल है। करीब 15 वर्षों में दो बार इस बांध का चौड़ीकरण व उच्चीकरण का कार्य हुआ है, लेकिन हर बार विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण ठेकेदार आते हैं और बंधे को छीलकर कार्य पूर्ण कर देते हैं। वर्ष 2022 में तटबंध का कार्य पूर्ण हुआ है। ऐसे में बंधे पर जगह- जगह होल कैसे दिख रहे हैं। डुमरिया बाबू से लेकर थरौली तक कई स्थानों पर तटबंध कमजोर है। बरसात के मौसम में जब नदी उफान पर आती है, इन क्षेत्रों में तटबंध से रिसाव का मामला सामने आता है। उसके बाद भी अधिकारी इस दिशा में गंभीर नहीं है। जल स्तर का दबाव यदि इस बार पड़ा तो बाढ़ की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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अधूरे मुड़ियारी- नटवा तटबंध से उड़े हैं ग्रामीणों के होश
धनघटा। कुआनों और कठिनइया नदी की बाढ़ की विभीषिका से आबादी को बचाने के लिए बना नटवा-मुड़ियारी तटबंध डेढ़ दशक बाद भी अधूरा पड़ा है। बंधे पर छह-सात अधिक जगह बड़े- बड़े गैप छोड़े गए है। यदि कुआनों और कठिनईया नदी उफान पर आई तो बंधे पर बने इस गैप के सहारे पानी आबादी में घुसकर तबाही मचा सकती है। वहीं कुछ जगहों पर बने रैन कट भी तटबंध के लिए काफी घातक हो सकते हैं।
वर्ष 2004-05 में नाथनगर ब्लॉक के कुआनों और कठिनईया नदी के किनारे बसे करीब 18 से अधिक ग्राम पंचायतों के गांव को बाढ़ से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने मुड़ियारी से लेकर नटवा तक तटबंध का निर्माण कराया था। निर्माण के समय ही बंधे में करीब सात से अधिक स्थानों पर बड़े- बड़े गैप छोड़कर निर्माण इकाई ने काम पूर्ण दिखा दिया। नटवा और गालिमपुर सीवान के बीच में चार सौ मीटर लंबा गैप इस तटबंध के पूर्ण होने की कहानी खुद बयां कर रहा है। ऐसे ही भैसही जोत, शेरपुर, गोपालपुर सहित अन्य स्थानों पर बड़े- बड़े गैप छोड़े गए हैं। ग्रामीणों ने आश्चर्य जताया कि पर्यवेक्षणीय अधिकारियों ने किस नजरिये से आधे अधूरे तटबंध को पूर्ण दिखा दिया। भारी बरसात होने पर नदी के पेट में जब पानी भर जाता है, तो इन्हीं गैप के सहारे तेज बहाव में पानी गांव के सिवान में लगी फसलों को डुबो देता है, जिससे किसानों की फसल जलमग्न होकर नष्ट हो जाती है। प्रत्येक वर्ष ग्रामीणों को इस अपूर्ण बंधे को पूर्ण होने की आस विभागीय अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते टूट जाती है। ऐसे में यह तटबंध किसानों के लिए वरदान से अधिक अभिशाप साबित हो रहा है। नटवा मुडियारी तक तटबंधों पर जगह जगह झाड़ झंखाड़ उग गए हैं।
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इन गांवों की सुरक्षा के लिए बना था तटबंध
धनघटा। नाथनगर ब्लॉक क्षेत्र के लगभग डेढ़ दर्जन गांव कुआनों और कठिनईया में आने वाली बाढ़ के चलते तबाह हो जाते थे। कुआनों नदी के किनारे बसे मुड़ियारी, सिसवनिया, कोहना, भीटी माफ़ी, घोलवा, बारीडीहा, शेरपुर, सुखीपुर, गोपालपुर, गुरहवा और मठिया गांव बाढ़ के पानी से तबाह हो जाते थे। ऐसे ही कठिनईया नदी की विभीषिका भैसही जोत, बनियापुर, हड़िया, गालिमपुर, हटवा नटवा आदि गांव प्रभावित होते थे। इन्हीं गांवों को बचाने के लिए इस तटबंध का निर्माण कराया गया था, लेकिन दो दशक बीतने को हैं, आज भी तटबंध अधूरा पड़ा है। भैसहिया गांव निवासी प्रकाश यादव ने बताया कि तटबंध निर्माण के बाद दोबारा विभाग ने सुध नहीं ली है। नतीजा यह है कि बंधा जगह-जगह जर्जर हो गया है। बरसात का मौसम शुरू होने में कुछ ही समय बचा है। इसके बावजूद विभाग स्तरीय कोई कार्य शुरू नहीं कराया गया। गालीमपुर गांव निवासी श्यामधर यादव ने बताया कि सिंचाई विभाग के जरिये बांध को कुछ स्थानों पर निर्माण के दौरान अधूरा छोड़कर आगे करा दिया गया। इसकी शिकायत कई बार की गई, लेकिन असर नहीं हुआ, जिसके परिणामस्वरूप हर वर्ष बारिश के सीजन में फसलें बर्बाद हो जाती है।
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जिले में सभी जगह बांध सुरक्षित है। बांध मरम्मत का कार्य कराया गया है। यदि कहीं जरूरत है तो उसे जल्द ही ठीक करा दिया जाएगा।।
-सतीश चंद्र, सहायक अभियंता ड्रेनेज खंड
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नदियों के किनारे बने तटबंधों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य कराए जाने का निर्देश ड्रेनेज खंड के अधिकारियों केे दिया गया है। जहां कहीं रेन कट या होल बने है,उसे समय रहते दुरूस्त करा दिया जाएगा।
- संदीप कुमार, डीएम