-जन साहित्यिक मंच ने की कवि गोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल परिसर में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें बतौर मुख्य अतिथि वरिष्ठ रचनाकार एहसास मगहरी ने अपनी रचना ''अभी अपनी हस्ती है दिन का उजाला, जब आंखे मुदेंगी तभी रात होगी'' से कवि गोष्ठी की शुरूआत की।
मजहर खलीलाबादी ने ''घर से घबरा के मैं निकला था मगर, जा के परदेश में घर याद आया'' सुनाकर घर के महत्व को रेखांकित किया। ओम प्रकाश गौतम ने ''बैठ जाएंगे कहीं भी हम इबादत के लिए, सिर्फ मस्जिद में खुदा हो जरूरी तो नहीं'' सुनाकर खुदा के सर्वत्र होने की बात बताया। युवा कवि राजेश मृदुल ने ''रिश्ते लहू के जब लहूलुहान हो गए, फौलाद जिगर थे मगर बेजान हो गए'' सुनाया जिसे वहां मौजूद लोगों ने सराहा। राधेश्याम मिश्र श्याम ने ''वादे पर वादा करना क्या अच्छा है, रोजी-रोटी सबको ये सरकार दे'' सुनाकर नेताओं से झूठा वादा न करने की अपील की।
सूरज कुंवर सरस ने ''दुआ की फिर किसी ने क्या मुझे मजनूं बना दिया, देना जलालत की अदाओं से मुहब्बत की सजा देना''। सुनाकर वाहवाही लूटी। वरिष्ठ कवि राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने आदमी फुटबाल बनके रह गया, हर तरफ से सिर्फ मारा जा रहा है। सुनाकर आदमी की दीन-दशा की ओर इशारा किया।
वहीं डॉ. सईद अख्तर बस्तवी ने ''वो पहले मोहब्बत का नशा भूल ही जाओ, ये किसने कहा इश्क दोबारा नहीं होता'' सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया।
गोष्ठी में हामिद खलीलाबादी, सरदार हरभजन सिंह, मनोहर लाल मिश्र, ज्योति सिंह, छेदीलाल वर्मा, अकील अहमद आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।