- वर्ष 2012 में दुधारा में छापा मारने के दौरान पकड़ी गई थी 220 बोरी खाद्यान्न व 27 बोरी डीएपी
- कोर्ट में दुकानदार को पाया था दोषमुक्त, खाद्यान्न को अधिकारियों ने नहीं किया था वापस
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला पूर्ति अधिकारी व जिला कृषि अधिकारी ने वर्ष 2012 में पकड़े गए खाद्यान्न का निस्तारण नहीं किया। इसकी वजह से खाद्यान्न सड़कर खराब हो गया। डीएम कोर्ट ने पीड़ित के प्रार्थनापत्र पर तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी व जिला कृषि अधिकारी से 220 बोरी खाद्यान्न व 27 बोरी उवर्रक के दाम वसूल करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि अगर यह अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए हैं तो उनके पेंशन से वसूली कर न्यायालय में दो माह के अंदर जमा करने का निर्देश जिला पूर्ति अधिकारी और जिला कृषि अधिकारी को दिए हैं।
आठ मई 2012 को एसडीएम मेंहदावल की टीम ने दुधारा स्थित बबलू की दुकान में छापा मारकर 220 बोरी गेंहू व 27 बोरी डीएपी खाद्य पकड़ा था। जिसे सरकार के पक्ष में जमा किया गया था। जिस पर दुधारा थाने में केस दर्ज हुआ था। पीड़ित दुकानदार बबलू ने सीजेएम न्यायालय में वाद दाखिल किया था। सुनवाई में न्यायालय ने उसे दोषमुक्त का दिया था और जब्त की गई गेंहू व डीएपी अवमुक्त या उसकी रकम पीड़ित को देने का आदेश दिया था। लेकिन पीड़ित को इसकी रकम नहीं मिली। जिसके बाद उसने डीएम न्यायालय में वाद दाखिल किया।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सुनवाई करते हुए 220 बोरा गेहूं व 27 बोरा डीएपी जो सड़ गलकर नष्ट हो चुका है, उसका उस समय का मूल्य का आकलन कर बबलू पुत्र बेचन निवासी भिटिया थाना दुधारा प्राप्त कराए जाने का आदेश दिया है। आदेश की प्रति जिला पूर्ति अधिकारी और जिला खाद्य विपणन अधिकारी व जिला कृषि अधिकारी को भेजते हुए निर्देश दिया है कि खाद्यान्न व उर्वरक का तत्समय की सरकारी कीमत की दर पर आकलन कर धनराशि की वसूली कटौती उस समय के जिला पूर्ति अधिकारी और जिला कृषि अधिकारी के वेतन और पेंशन से करते हुए वसूली कटौती की धनराशि इस न्यायालय में दो माह के अंदर जमा करें। जिससे वांछित धनराशि विपक्षी बबलू को प्राप्त कराते हुए पत्रावली अभिलेखागार में संक्षित किया जा सके।