- जन साहित्यिक मंच की मासिक काव्य गोष्ठी हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें वरिष्ठ रचनाकर राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने अपनी रचना ‘गलत काम निर्बाध हो रहे, सही काम में बाधा है, मर्यादा पुरूषोत्तम के घर तार-तार मर्यादा है’..सुनाकर गोष्ठी की शुरूआत की।
कवि सरदार हरिभजन सिंह भजन ने ‘मां संवेदना है, भावना है, अहसास है, मां जीवन के फूलाें में खुशबू का वास है..सुनाकर मां के विभिन्न रूपों को बताया। सुरज कुंवर सरस ने शुभ दर्शन घिरि आई बदरिया, सुनाकर आसमान में छाए बादलों की ओर इशारा किया। अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने तुम गरीबी को मिटाना चाहते हो, या मरीबों को मिटाना चाहते हो.. सुनाया जिसे सराहा गया।
गोष्ठी का संचालन कर रहे राधेश्याम मिश्र श्याम ने ‘कर्म मां बाप का है ये हमें रोने नहीं देते जरा आंखों को अश्कों से कभी धोने नहीं देते..सुनाकर मां-बाप के महत्व को बताया। उस्ताद शायर शारिक खलीलाबादी ने घटा है अब्र है सागर है खम है, मगर तुम कौन सी दुनिया में गम है। सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया। युवा शायर पवन सबा ने चहुं दिश खुश्बू ढूंढ रहा मन मिलता नहीं फजाओं में, शीतलता भी लुप्त हो गई, जैसे गर्म हवाओं में। सुनाकर मौसम की तल्खी की ओर इशारा किया। युवा कवि अविनाश पांडेय ने प्रेयसी तुम वर्णन की कथा हो, मंत्र मुग्ध करने की व्यथा हो, सुनाकर वाहवाही लूटी। इस दौरान वेद प्रकाश, राकेश कुमार, प्रदीप चंद्र आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।