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Sant Kabir Nagar News: रीयल टाइम खतौनी, नहीं देना पड़ेगा चढ़ावा

Wed, 31 May 2023 11:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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खलीलाबाद तहसील में खेतौनी निकालने के लिए लगी लोगों की भीड़।संवाद
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संतकबीरनगर। रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था लागू होने के बाद किसी को तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। भूमि का बैनामा कराने के बाद खतौनी पर नाम चढ़वाने के लिए न ही चढ़ावा चढ़ाना पड़ेगा, न भटकना पड़ेगा। रियल टाइम खतौनी से बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाएगा।
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इसके लिए तहसीलों से लेकर राजस्व परिषद तक में तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उधर शासन ने नई व्यवस्था लागू होने के पहले 31 जुलाई तक खतौनी से जुड़ी सभी खामियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था के चलन में आ जाने के बाद खतौनी में नाम सुधार जैसे कई खामियों को दुरुस्त नहीं कराया जा सकेगा। हालांकि खतौनी से जुड़ी खामियों को दुरुस्त करने की रफ्तार अभी सुस्त है। इस रफ्तार से जुलाई तक लक्ष्य पूरा कर पाना चुनौती से कम नहीं है। रियल टाइम खतौनी 19 कॉलम की होगी। अभी वर्तमान खतौनी सिर्फ 13 कॉलम की है।
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रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था ऐसे काम करेगी
संपत्ति का बैनामा कराने के बाद नामांतरण के लिए विलेख की एक प्रति तहसील चली जाती है। वहां 45 दिनों में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यानी विक्रेता का नाम काटकर क्रेता का नाम चढ़ता है। इसके बाद अमल दरामद के लिए फाइल जाती है, और खतौनी में नाम चढ़ने पर भी दो से तीन महीने का समय लग जाता है। नाम जल्द चढ़वाने के लिए आवेदकों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू होने के बाद बैनामा होने के 24 घंटे के भीतर ही क्रेता का नाम खतौनी पर चढ़ जाएगा। बीच की सभी तरह की उलझाऊ प्रक्रिया से निजात मिल जाएगी।
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केस - 1
खलीलाबाद निवासी संतोष कुमार ने बताया कि फर्म के नाम से बकुची और उसके टोला गुलेला में करीब 30 एकड़ जमीन का बैनामा कराया है। यहां की खतौनी नहीं मिल पाने की वजह से दाखिल- खारिज नहीं हो पा रहा है। इसके लिए दो महीने से अधिक समय से परेशान हूं।

केस- 2
खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के विश्वनाथपुर निवासी गिरजेश ने बताया कि प्रमाणित खतौनी के लिए कई बार आ चुके हैं, लेकिन कभी सर्वर के काम नहीं करने और कभी कोई और बहाना बताकर खतौनी नहीं दी जा रही है। बाहर सर्वर फेल होने से आज खतौनी नहीं मिल पाई है। किसी की जमानतदार बनने के लिए प्रमाणित खतौनी की आवश्यकता पड़ती है। बताया जा रहा है कि रियल खतौनी हो रही है। अब यह समस्याएं दूर हो जाएगी।
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रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती
भूमि के विक्रेता का नाम हटाकर उसकी जगह क्रेता का नाम चढ़ाने के लिए तहसील में फाइल जाती है। तब इसकी जांच लेखपाल करते हैं। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया होती है। तमाम लोग शिकायत कर चुके हैं कि इस दौरान जिसने चढ़ावा दे दिया, उसके खारिज दाखिल में कोई दिक्कत नहीं आती। आसानी से उसका नाम खतौनी में चढ़ जाता है। यदि किसी ने भेंट देने में कोई चूक की तो उसे तहसील का चक्कर लगाना ही पड़ता है। कभी लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग पाती है, तो कभी अधिकारी नहीं मिलते हैैं। अधिकांश मामलों में लेखपाल की रिपोर्ट लगाने में विलंब होता है। इस चक्कर में 45 दिन के बजाय तीन से चार महीन लगते हैं। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी इससे इंकार करते हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जिस मामले में कोई आपत्ति होती है या गड़बड़ी पाई जाती है। उसमें ही दिक्कत आती है।
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नई व्यवस्था से राहत, मगर फर्जीवाड़े का तोड़ जरूरी
शासन की ओर से रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू किए जाने के बाद लोगों को तहसीलों की दौड़ लगाने और चढ़ावा देने से तो राहत मिल जाएगी। नई व्यवस्था में खाताधारकों का अंश तय करने में भी दिक्कत नहीं होगी। इससे कोई भी व्यक्ति अपने अंश से अधिक दूसरे का अंश नहीं बेच पाएगा, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक जमीन का फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा। बैनामा के 24 घंटे के भीतर ही खतौनी पर नाम चढ़ जाने से जब तक जमीन के फर्जीवाड़े की जानकारी होगी, तब तक जमीन दूसरे के नाम यानी जमीन खरीदने वाले के नाम दर्ज हो जाएगी। इसके बाद वह किसी और को और वह किसी और को दो से तीन दिन के भीतर जमीन बैनामा कर सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान क्रेता, विक्रेता दोनों को सूचना भेजी जाती है। फर्जीवाड़े के मामले में आपत्ति दाखिल होती है और कई लोगों को राहत भी मिलती है। कई अधिवक्ता भी नुकसान की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि बैनामा के बाद इश्तिहार की प्रक्रिया होती है। क्रेता और विक्रेता के पास इसे भेजकर जानकारी दी जाती है, लेकिन रियल टाइम खतौनी होने से इश्तिहार नहीं दिया जा सकेगा। इन दिक्कतों का तोड़ निकालना जरूरी है।
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रियलटाइम खतौनी के ये हैं फायदे
- भूमि का बैनामा होने के 24 घंटे के बाद ही नई खतौनी जारी हो जाएगी। विक्रेता की जगह क्रेता का नाम चढ़ जाएगा।
- इस खतौनी से गाटा संख्या में खातेदारों के नाम के आगे अंश (उनके हिस्से की कितनी भूमि है) उसका जिक्र होगा।
- अंश का जिक्र होने से कोई व्यक्ति अपने हिस्से से अधिक भूमि नहीं बेच सकेगा। कोई किसी की भूमि पर अधिक कब्जा नहीं कर सकेगा।
- खतौनी के लिए तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। काम कराने के नाम पर दलाल वसूली नहीं कर पाएंगे।
- जमीन के कारोबारी या खरीदार, किसी लालच में पड़कर आपत्ति नहीं लगा सकेंगे।
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रियल टाइम खतौनी की व्यवस्था लागू होने से ज्यादातर समस्याएं स्वत: दूर हो जाएंगी। किसी को इधर-उधर भटकना नहीं पडे़गा। 24 घंटे के अंदर खतौनी जारी हो जाएगी। सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है। जरूरी कार्यों को तेजी से कराया जा रहा है। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
-अभिनव रंजन श्रीवास्तव, एडीएम

नई व्यवस्था से बैनामा के 24 घंटे के अंदर क्रेता और विक्रेता का नाम खतौनी में चढ़ जाएगा। उसके बाद खतौनी मिल जाएगी। अभी तो नामांतरण की प्रक्रिया में तीन से चार माह लग रहा है। लोग रोजाना भटकते रहते हैं। इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहिए। यह व्यवस्था जनहित में है।
-सदरूद्दीन बद्र , अधिवक्ता
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इससे खतौनी तो 24 घंटे में मिल जाएगी लेकिन, गलत बैनामा होने, कम जमीन का पैसा देकर अधिक भूमि लिखवा लेने सहित अन्य मामलों में दिक्कत आएगी। जब तक कोई शिकायत होगी, तब तक फर्जीवाड़ा करने वाले एक ही भूमि को कई लोगों को बेच चुके होंगे।
-गंगाराम, अधिवक्ता

खतौनी लेने के लिए काफी समय लग रहा है। नई व्यवस्था ठीक तो है, लेकिन कुछ समस्याएं हैं। रियल टाइम खतौनी की सुविधा लागू होने के बाद समझना पड़ेगा की कैसी समस्याएं आएंगी। धीरे-धीरे पुरानी खतौनी चलन से बाहर हो जाएगी। उसके स्थान पर 19 कालम की रियल टाइम खतौनी में खसरा को भी जोडे़ जाने की बात हो रही है।
-लाल जी यादव, अधिवक्ता
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गाटा संख्या ही रियल टाइम खतौनी मिलेगी। एक कास्तकार कई गाटों में नाम होने के कारण अलग-अलग गाटों की अलग-अलग खतौनी निकालनी होगी। इसमें कास्तकार को अधिक रकम खर्च करनी पडे़गी। पुरानी व्यवस्था में यदि एक खाते के कई गाटों में कास्तकार का नाम है तो एक खतौनी निकालने में उसकी समस्या हल हो जाती है, और पैसा भी कम खर्च होता है। रियल टाइम खतौनी से राजस्व की प्राप्ति तो सरकार को होगी, लेकिन गरीब कास्तकार को हानि होगी।
-कुंवर राणा प्रताप, अधिवक्ता

1663 राजस्व गांवों की होनी है रियल टाइम खतौनी
प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 1733 राजस्व गांव हैं। इसमें 1663 राजस्व गांवों की रियल टाइम खतौनी की जानी है। शेष 70 गांव चकबंदी में हैं और दो गांवों में फसली वर्ष गलत अंकित है। 529 गांवों की वर्तमान खतौनी को रियल टाइम खतौनी में बदला जा चुका है। राजस्व निरीक्षक के जरिये डीएम को 480 राजस्व गांवों को लॉक करने के लिए प्रेषित किया गया है। जबकि 284 राजस्व गांव अनलॉक के लिए एसडीएम को प्रेषित है।
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