- राप्ती नदी खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर नीचे बह रही
- सरयू नदी 10 सेंटीमीटर घटी, ढोलबजा पुरवे गांव के अस्तित्व पर संकट
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। खतरे के निशान से नदी महज 12 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। वहीं सरयू नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर घट गया है, लेकिन नदी की कटान से गायघाट दक्षिणी गांव के ढोलबजा पुरवे के 15 घरों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
मेंहदावल प्रतिनिधि के मुताबिक राप्ती नदी लाल निशान छूने को आतुर दिख रही है। मंगलवार को नदी का जलस्तर 78.90 मीटर पर था। बुधवार को जलस्तर 78.97 मीटर पर पहुंच गया, जो लाल निशान से 53 सेंटीमीटर नीचे था। बृहस्पतिवार को राप्ती के जलस्तर में उछाल आया और 79 मीटर पार करते हुए नदी का जलस्तर 79.18 मीटर पर पहुंच गया।
वहीं शुक्रवार को सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 79.34 मीटर पर पहुंच गया, जो लाल निशान से मात्र 16 सेंटीमीटर नीचे बह रही है, जबकि शाम को राप्ती का जलस्तर बढ़कर 79.38 मीटर पर पहुंच गया। अब राप्ती लाल निशान से मात्र 12 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
शुक्रवार को राप्ती का जलस्तर सुबह बढ़ने से विभागीय अधिकारी सक्रिय हो गए और सहायक अभियंता राम उजागिर लाल के नेतृत्व में 19.2 किलोमीटर तटबंध का निरीक्षण किया। बेलौली बिशनपुर बांगर और जोरवा में बरसात होने से बने रेनकट को मजदूरों को लगाकर भराया गया। जहां नदी बैक रोलिंग कर रही थी और कटान होने की आशंका थी वहां भी विभागीय अधिकारियों की देखरेख में कार्य कराए गए।
अवर अभियंता वीरेंद्र यादव और दिनेश कुमार ने बताया कि जलस्तर बढ़ने के बाद भी तटबंध पर कोई प्रभाव नहीं है। तटबंध को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए विभागीय स्तर पर ठोस पहल किया गया है। जलस्तर और तटबंध की लगातार निगरानी कराई जा रही है और जहां आवश्यकता है वहां बाढ़ निरोधक कार्य कराए जा रहे हैं।
सरयू नदी के जलस्तर में कमी, कटान तेज
धनघटा। सरयू नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आनी शुरू हो गई है। शुक्रवार को 10 सेंटीमीटर पानी घटने से नदी का जलस्तर 78.900 मीटर पर पहुंच गया। बाढ़ के पानी में कमी आने से तटवर्ती गांव के लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन नदी की कटान से गायघाट दक्षिणी गांव के ढोल बजा गांव के 15 घरों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
पहाड़ी बारिश की वजह से सरयू नदी तीन दिनों में बढ़ते हुए 77.900 मीटर से 79.00 मीटर पर पहुंच गया था। खतरे के निशान 79.400 मीटर के करीब नदी का पानी पहुंचने से एमबीडी बांध और नदी के बीच के 18 गांव घिरने लगे थे, लेकिन बाढ़ का पानी हटने के बाद भी गायघाट दक्षिणी, सियर कला, दौलतपुर, गुनवतिया, चकदहा, पटौवा टोला, सुअरहा, सियाराम अधीन, भौवापार गांव के पास नदी का पानी पहुंच चुका है। नदी की कटान से ढोल बजा गांव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू, विनोद कुमार, राम शंकर, राधेश्याम, रवि शंकर आदि का कहना है कि नदी इसी तरह कटान की तो ढोलबजा गांव को नदी की धारा में समाते देर नहीं लगेगा। कटान के कारण गांव के लोग दहशत में है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड दो के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने बताया कि नदी के जलस्तर में कमी होनी शुरू हो गई है। 10 सेंटीमीटर नदी का पानी घटा है। इसके बाद भी बांध पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। इस संबंध में सहायक अभियंता ने अवर अभियंता अर्चना गुप्ता आदि के साथ शुक्रवार को बांध का निरीक्षण किया। जहां पर भी बांध कमजोर है, वहां मिट्टी डाली जा रही है।