संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय काशिफ शेख ने दुष्कर्म व अपहरण के मामले में दोषी पाए जाने पर पुत्र को 10 वर्ष तथा मां को तीन वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई। मां-बेटा पर 42 हजार रुपये अर्थ दंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर 15 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को दी जाएगी।
विशेष लोक अभियोजक अच्युतानंद शुक्ला ने बताया कि मेंहदावल क्षेत्र के एक गांव के पीड़ित पिता ने एसपी को तहरीर दी कि 16 जून 2011 को उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी को गांव का युवक बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। उसकी मां ने सहयोग किया। गांव वालों के सम्मिलित प्रयास से 21 जून 2011 को आरोपी रात को लड़की को घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया।
बेटी ने बताया कि युवक की मां उसको बहला-फुसलाकर अपनी लड़की के यहां ले गई थी। कुछ समय बाद उसका पुत्र भी वहां पहुंच गया। जब वह घर जाने के लिए रोने लगी तो उन लोगों ने मारपीट कर उसे रोक लिया। जब आरोपी के परिवार वालों से पूछा गया तो उसका पूरा परिवार लाठी-डंडे के साथ उसको एवं उसके परिवार को मारने के लिए घर तक आ गए। किसी तरह भागकर हम लोगों ने जान बचाई। बेटी को जबरन ले जाने और विरोध करने पर बेटी को जान से मारने की धमकी देते हैं। तहरीर के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध मेंहदावल थाने में केस दर्ज हुआ। विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। कोर्ट ने युवक को दुष्कर्म का दोष सिद्ध पाए जाने पर 10 वर्ष सश्रम कारावास तथा अपहरण का दोषी पाए जाने पर मां को तीन वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। साथ ही दोनों पर 42 हजार रुपये जुर्माना लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर 15 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।