अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा होने से चारों तरफ उल्लास
इंद्रेश यादव
धनघटा। अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने से राम जानकी मार्ग से सटे लोग अपने को धन्य मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि कभी प्रभु श्री राम इसी रास्ते जनकपुर से माता जानकी को साथ लेकर बरात समेत लौटे थे। आज जब अयोध्या में भव्य मंदिर में विराजमान हुए तो इस सौभाग्यशाली पल को देखकर आंखों में खुशी के आंसू छलक रहे हैं। प्रभु श्रीराम जनकपुर से बरात के साथ इसी रास्ते गए तो इस मार्ग का नाम राम जानकी मार्ग हो गया। धनघटा तहसील क्षेत्र राम जानकी मार्ग के दायरे में आता है।
भगवान श्री राम माता जानकी व बरात के साथ धनघटा तबका भीऊघाट के रास्ते अयोध्या गए थे। इसका उल्लेख शास्त्रों में भी है और बुजुर्ग बताते चले आ रहे हैं। आज जब वह अयोध्या में भव्य मंदिर में विराजमान हो रहे हैं तो खुशी का ठिकाना नहीं है।
- रामजी पांडेय
प्रभु श्री राम के मंदिर में विराजमान होने का लंबे अरसे से लोग इंतजार कर रहे थे। मंदिर के लिए जाने कितने लोग अपनी जान न्योछावर कर दिए। तो इस मौके पर खुशी क्यों नहीं होगी। राम जानकी मार्ग के किनारे वालों के लिए यह तो बहुत बड़ा सौभाग्य का पल है।
- ओम प्रकाश यादव
अवधपुरी ममपुरी सुहावन, उत्तर दिशा सरयू बहे पावन इस चौपाई के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास ने जिस तरह अयोध्या का परिचय कराया है। उसी तरह राम जानकी मार्ग का उल्लेख भी धर्म शास्त्रों में आता है। आज जब प्रभु श्री राम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए तो यह धरा धन्य हो गई।
- बिंदु जी मिश्रा
राम जानकी मार्ग का नामकरण माता जानकी और प्रभु श्री राम के नाम से अनायास नहीं हुआ है। प्रभु श्री राम जनकपुर से बरात के साथ अयोध्या इसी रास्ते से होकर लौटे थे। आज जब अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो गई तो अयोध्या के साथ राम जानकी मार्ग की भी शोभा बढ़ गई।
- राजेंद्र प्रसाद मौर्य