- आत्महत्या के मामलों में दिन-प्रतिदिन हो रही बढ़ोतरी
- नशा, घरेलू समस्या और प्रेम संबंध में विफलता आदि के मामले आ रहे सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जनपद में आत्महत्या के मामलों में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। विशेषज्ञों की मानें तो दिखावे की संस्कृति हताशा का कारण बन रहा है। इसके अलावा नशा, घरेलू समस्या, प्रेम संबंध में विफलता आदि मामले भी पुलिस जांच में सामने आ रहे हैं। जिसके वजह से लोग आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।
आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। इसी माह में बखिरा, मेंहदावल व धनघटा क्षेत्र में आत्महत्या के कई मामले प्रकाश में आए है। कहीं पर पारिवारिक विवाद तो कहीं पर मानसिक दबाव युवा नहीं झेल पाए और फंदे से लटक कर जान दे दी। ज्यादातर मामलों में पुलिस जांच के बाद मानसिक तनाव सामने आया है। जिसमें उलझकर लोगों ने आत्मघाती कदम उठा लिया। इसके अलावा तनाव की वजह से परिजनों का भी ख्याल नहीं रखा और दबाव को नहीं झेल पाए।
केस एक
धनघटा क्षेत्र के मिठना गांव निवासी सुशील (28) पुराने ट्रैक्टर खरीदने व बेचने का काम करता था। दो अक्तूबर को वह घर से निकले, तीन अक्तूबर की सुबह गौरापार के पास स्थित बाग में पेड़ से लटका शव मिला। सुशील की मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिग बताया गया। रुपये के लेनदेन को लेकर मानसिक तनाव में रहने का मामला सामने आया।
केस नंबर दो
हैंसर बाजार धनघटा निवासी आशुतोष (28) दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था। इसी सप्ताह में वह दिल्ली से घर लौटा। 18 अक्तूबर को आशुतोष का शव सुबह घर में छत की कुंडी में लटका देखा गया। परिजनों की मानें तो मृतक मानसिक दबाव में था, जिसके वजह से आत्मघाती कदम उठा लिया।
केस नंबर तीन
मेंहदावल क्षेत्र के पुरवा मोहल्ला निवासी विनोद शर्मा (40) लकड़ी का करोबार करता था। उनका शव तीन अक्तूबर को घर में फंदे के सहारे लटका पाया गया। पुलिस जांच में पता चला कि विनोद काफी लंबे समय से अवसाद में था, जिसके बाद घर में फंदे से लटक कर जान दे दी।
केस नंबर चार
बखिरा क्षेत्र के हावपुर भडारी गांव निवासी विवाहिता ने फंदे से लटक कर जान दे दी। कुसुम (27) का पति विमल रोजगार के सिलसिले में महाराष्ट्र रहता है। पुलिस जांच में पाया गया कि वह किसी बात को लेकर इन दिनों तनाव में चल रही थी, जिसके बाद फंदे से लटक कर जान दे दी।
युवाओं पर मानसिक दबाव धकेल रहा आत्महत्या की ओर
एचआरपीजी कॉलेज के समाज शास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर विजय कुमार मिश्र ने बताया कि आज के समाज में आत्महत्या की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। इसके पीछे अनेक जटिल कारण हैं। जिनमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, शैक्षणिक दबाव, सामाजिक और आर्थिक समस्याएं, प्रेम संबंधों में विफलता, व्यसन और घरेलू हिंसा आदि प्रमुख हैं। युवाओं पर मानसिक समस्याओं का बोझ काफी ज्यादा है, लेकिन उनमें से ज्यादातर इसका इलाज नहीं कराते। परीक्षाओं में सफलता का अत्यधिक दबाव, अभिभावकों और शिक्षकों की अपेक्षाएं और विफलता का डर युवाओं को आत्महत्या की ओर धकेल रहा है। इसके अलावा भौतिकता की अंधी दौड़ में कहीं न कहीं व्यक्ति मौलिकता से दूर होता जा रहा है और दिखावे की संस्कृति में वह हताश और अपने को अकेला महसूस कर रहा है। जिसके कारण वह आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहा है।