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Sant Kabir Nagar News: सूत की बढ़ी कीमतों से बंदी के कगार पर पावरलूम उद्योग

Tue, 06 Feb 2024 11:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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मेंहदावल। क्षेत्र में हथकरघा उद्योग बंदी के कगार पर हैं। कपड़ों की बुनाई पावरलूम से शुरू हुई, लेकिन वर्ष भीतर आसमान छूती सूत की कीमत ने पावरलूम व बुनकरों के भविष्य पर विराम लगा दिया। इसका नतीजा यह है कि बुनकर अब दूसरे कामों में भविष्य तलाश रहे हैं और रोजी-रोटी की तलाश में महानगरों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
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जनपद का उत्तरांचल का क्षेत्र बुनकर बाहुल्य है। बघौली विकास खंड के नौरो, अमरडोभा, लेडुआ महुआ, बखिरा समेत कई स्थानों पर बुनकर पहले हथकरघा से कपड़ों की बुनाई करते थे। आधुनिक युग में पावरलूम चलाकर कपड़ों की बुनाई करते हैं। वही मेंहदावल विकास खंड के नन्दौर, ब्रम्हचारी, बारागद्दी, केवटलिया सानी, नई बाजार, ठाकुरद्धारा, पश्चिम टोला, सांथा विकास खंड के लोहरसन, भिटिया, पसाई, धर्मसिंहवा आदि कई ऐसे स्थान हैं जो बुनकर बाहुल्य इलाका माना जाता हैं। पहले यहां हथकरघा बुनकरों के जीवन यापन का मुख्य व्यवसाय था। बुनकरी से बने कपड़ों की मांग उत्तर प्रदेश के अलावा बंगाल, असम, महाराष्ट्र, गुजरात आदि प्रांतों में खूब थी। खलीलाबाद के बरदहिया बाजार ने बुनकरों के तैयार कपड़ों से अपनी पहचान कायम की थी, लेकिन वर्तमान समय में हथकरघा उद्योग बंदी के कगार पर हैं। आधुनिकता की इस दौर में पावरलूम ने जगह बनायी। बुनकर पावरलूम से गमछा, चद्दर, लुंगी, दुपट्टा व सूती कपड़ों की बुनाई करते थें। जिनकी मांग क्षेत्र के अलावा अन्य जनपदो व प्रांतों में खूब रही। इससे बुनकरों को अच्छी आय हो जाती थी। लेकिन वर्तमान समय में सूत के दाम आसमान छू रहे हैं। जिसके कारण पावरलूम का कारोबार भी ठप पड़ गया हैं।
800 में मिलने वाले सूत की कीमत 1600 हुई
बुनकर मुस्ताक, अब्दुल कयूम, बदरे आलम, मुस्ताक अहमद, जुम्मन अली, अनवर, बरसाती, कल्लीमुललाह आदि का कहना है कि 800 में मिलने वाले 24 नंबर सूत की कीमत 1600 के करीब पहुंच गयी है। सूत की कीमत लगातार बढ़ रही है। तैयार माल के लिए बाजार उपलब्ध नहीं है। सरकार की तरफ से जो भी योजनाएं चला जा रही हैं उनका लाभ बुनकरों को सीधे मिलने की जगह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रहा है। यही कारण है कि आज बुनकारी का व्यवसाय बंदी के कगार पर खड़ा है। अगर सूत के दाम कम होंगे तभी यह व्यवसाय चल पाएगा।
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